Madhumita Shukla कौन थी? गोली से छलनी गर्भवती की लाश-23 साल बाद बहन निशाने पर, UP के बाहुबली नेता से जुड़े तार

Lucknow Madhumita Shukla Murder Case: लखनऊ की पेपर मिल कॉलोनी में एक युवा कवयित्री की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मधुमिता शुक्ला महज 24-25 साल की थीं। पोस्टमॉर्टम में पता चला कि वे सात महीने की गर्भवती थीं। इस हत्याकांड ने उत्तर प्रदेश की राजनीति को हिलाकर रख दिया। मुख्य आरोपी बाहुबली नेता और तत्कालीन मंत्री अमरमणि त्रिपाठी थे। उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी पर भी साजिश रचने का आरोप लगा।

इस वारदात को 20 साल से ज्यादा समय बीत गया, लेकिन मामला आज भी सुर्खियों में है। 25 अगस्त 2023 को अमरमणि और मधुमणि को जेल से रिहा किया गया। अब कवयित्री मधुमिता शुक्ला की बहन निधि शुक्ला पर बम हमले का प्रयास और शूटर की मौत ने पुरानी घाव को फिर हरा कर दिया है। आइए पूरी कहानी विस्तार से समझते हैं- मधुमिता कौन थीं, अमरमणि से रिश्ता कैसे बना, हत्या की साजिश, जांच, मुकदमा, DNA सबूत, राजनीतिक दबाव और आज बहन पर हमला...

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Who Was Madhumita Shukla: कौन थी मधुमिता शुक्ला? लखीमपुर खीरी की प्रतिभाशाली कवयित्री

मधुमिता शुक्ला उत्तर प्रदेश के लखीमपुर खीरी जिले के एक छोटे कस्बे से ताल्लुक रखती थीं। कम उम्र से ही वे कविता पाठ के लिए जानी जाती थीं। महज 16 साल की उम्र से वीर रस की कविताएं पढ़ने लगीं। उनकी कविताओं में देशभक्ति, साहस और सामाजिक मुद्दों की झलक मिलती थी।

लखनऊ आकर उन्होंने अपनी प्रतिभा को आगे बढ़ाया। कवि सम्मेलनों में उनकी धाक थी। लोग उन्हें सुनने पहुंचते थे। उस दौर में वे उभरती कवयित्री के रूप में पहचान बना रही थीं। आर्थिक रूप से सामान्य परिवार से आने वाली मधुमिता अपनी मेहनत से करियर बना रही थीं। उनकी जुड़वां बहन निधि शुक्ला भी उनके साथ थीं। दोनों बहनों का रिश्ता बेहद करीबी था।

Madhumita Shukla Amarmani Tripathi Love Story: अमरमणि त्रिपाठी से मुलाकात और कथित लव स्टोरी

अमरमणि त्रिपाठी उस समय यूपी की राजनीति के बाहुबली चेहरे थे। महाराजगंज की नौतनवा सीट से विधायक। विभिन्न सरकारों में मंत्री रह चुके थे। BSP की मायावती सरकार में भी उनका दबदबा था। मधुमिता की कविताएं सुनने अमरमणि की मां सावित्री मणि और बेटियां अन्नू-तन्नू जाती थीं। धीरे-धीरे परिवार में आने-जाने से मधुमिता और अमरमणि के बीच नजदीकियां बढ़ीं। अमरमणि उस समय करीब 48 साल के थे, जबकि मधुमिता 20 के आसपास।

जांच के अनुसार, दोनों के बीच घनिष्ठ संबंध बन गए। मधुमिता गर्भवती हो गईं। उन्होंने शादी का दबाव बनाया। अमरमणि पहले से शादीशुदा थे। पत्नी मधुमणि, दो बेटियां और परिवार था। यह संबंध परिवार के लिए खतरे की घंटी बन गया।

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9 मई 2003 की काली शाम: मधुमिता की हत्या, पेट में अमरमणि की नाजायज औलाद!

शाम करीब 6:30 बजे पेपर मिल कॉलोनी में मधुमिता के घर दो युवक पहुंचे। नौकर देशराज को चाय बनाने भेज दिया गया। जैसे ही वह किचन गया, दोनों ने मधुमिता को गोली मार दी। देशराज ने उन्हें बाइक पर भागते देखा।

मधुमिता की बहन निधि शॉपिंग से लौटीं तो बहन की लाश बेड के किनारे पड़ी मिली। निधि ने पहले अमरमणि को फोन किया, फिर पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंचे तत्कालीन SP क्राइम राजेश पांडेय (रिटायर्ड IPS) ने बताया कि मधुमिता की लाश देखकर सब हैरान थे। पोस्टमॉर्टम में सात महीने का गर्भ सामने आया। फीटस का DNA टेस्ट करवाया गया, जो अमरमणि से मैच कर गया। यह सबूत मामले को मजबूत बनाने वाला सबसे बड़ा क्लू बना।

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स्थानीय पुलिस से CBI तक सफर

शुरुआत में लखनऊ पुलिस ने जांच की। लेकिन राजनीतिक दबाव के आरोप लगे। BSP सरकार में मायावती CM थीं। विपक्ष के दबाव और DNA रिपोर्ट के बाद मामला CBCID को सौंपा गया। CBCID ने अमरमणि और मधुमणि को आरोपी बनाया।

मायावती ने CBCID अधिकारियों को सस्पेंड भी किया। बाद में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर केस CBI को ट्रांसफर हुआ और उत्तराखंड शिफ्ट कर दिया गया। 2007 में देहरादून की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने अमरमणि त्रिपाठी, मधुमणि त्रिपाठी, शूटर संतोष राय और रोहित चतुर्वेदी (या प्रकाश पांडे संबंधित) को उम्रकैद की सजा सुनाई।

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सजा, अपील और समयपूर्व रिहाई

अमरमणि और मधुमणि ने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की, लेकिन राहत नहीं मिली। अमरमणि लंबे समय तक जेल के बजाय अस्पताल में रहे। अच्छे आचरण, उम्र और स्वास्थ्य के आधार पर 2023 में समयपूर्व रिहाई हो गई। मधुमिता की बहन निधि शुक्ला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उनका कहना है कि पूरी सजा काटे बिना रिहाई गलत है।

निधि शुक्ला पर जानलेवा खतरा: 30 जून की रात बम से हमला!

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मधुमिता की बहन निधि शुक्ला आज भी लड़ाई लड़ रही हैं। उन्होंने किताब लिखी है। शूटर रोहित चतुर्वेदी जेल से बाहर है। निधि का कहना है कि पिछले साल उनके घर के बाहर फायरिंग हुई। 30 जून की रात 3 बजे बम जैसा धमाका हुआ। लोहे के जाल ने सुरक्षा कर्मी की जान बचाई। उनके घर पर पहले चार जवान तैनात थे, अब सिर्फ एक। सुरक्षा बढ़ाने की मांग के बावजूद पुलिस ढील बरत रही है। लखीमपुर खीरी कोतवाली में तहरीर दी गई है। पुलिस कह रही है जांच चल रही है।

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आइए अब समझते हैं कि कितने प्रभावशाली अमरमणि त्रिपाठी....

अमरमणि त्रिपाठी का जन्म 1950 के आसपास। राजनीति की शुरुआत CPI से, फिर कांग्रेस, बाद में BSP और SP। 1989 में पहली बार विधायक बने। नौतनवा सीट से कई बार जीते। कल्याण सिंह, रामप्रकाश गुप्ता, राजनाथ सिंह सरकारों में मंत्री रहे। 2007 में जेल से सपा टिकट पर चुनाव लड़ा और जीते। बाहुबली छवि। कई विवादों में नाम रहा। मधुमिता कांड उनके करियर का सबसे बड़ा झटका बना।

MP-MLA कोर्ट से पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी भगोड़ा घोषित

पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी 22 साल पुराने व्यापारी के बेटे के अपहरण कांड में न्यायालय (MP-MLA कोर्ट) द्वारा भगोड़ा घोषित किए गए हैं। बार-बार समन और वारंट जारी होने के बावजूद हाजिर न होने पर पुलिस द्वारा उनकी संपत्तियों की कुर्क (सीज) करने की कार्रवाई भी की जा चुकी है।

अमरमणि के खिलाफ मधुमति हत्याकांड के बड़े सबूत

  • DNA टेस्ट: गर्भ में पल रहे बच्चे का मिलान अमरमणि से।
  • मधुमिता का पत्र: 'मैं इस बच्चे को मार नहीं सकती।'
  • गवाहों के बयान: नौकर देशराज, बहन निधि।
  • शूटरों की भूमिका: पिस्टल, प्लानिंग।

मामला BSP, SP, BJP सबकी सरकारों में चला। CBI जांच, कोर्ट ट्रांसफर, सब राजनीतिक दबाव की कहानियां कहते हैं। निधि शुक्ला का संघर्ष न्याय की मिसाल है। उन्होंने कहा कि जब सजा पूरी नहीं हुई तो माफी किस बात की?

शूटर प्रकाश पांडे की मौत

2020 के आसपास एक शूटर प्रकाश पांडे (कैंसर से) की मौत हो गई। उसने पिस्टल उपलब्ध कराई थी। उसकी मौत के बाद भी मामला चर्चा में आया। यह कांड पावर, अफेयर और क्राइम के गठजोड़ को दिखाता है। एक प्रतिभाशाली कवयित्री की हत्या ने कई सवाल खड़े किए, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक प्रभाव और न्याय व्यवस्था।

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