सावन विशेष : चुटकी भर सिंदूर और जन्मों का साथ
दोस्तों, हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह 'श्रृंगार की महत्ता' की लेखिका 'कुमद मेहरोत्रा' ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 4 यानी नथुनी के बारे में, आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 5 के बारे में, जिसें हम सिंदूर कहते हैं। भारतीय वेदांग के मुताबिक शरीर में सिर का हिस्सा सूर्य का होता है और सूर्य आत्मा का कारक है इसलिए इस श्रृंगार के माध्यम से प्रथम बार कोई पुरूष किसी स्त्री को अपनी संगिनी बनाता है।
इसलिए जीवन में इसकी निरन्तरता और स्थायित्व बना रहे इसलिए विवाह के मुहूर्त बहुत सोच विचार कर निर्धारित किया जाते हैं। सिंदूर के बिना समस्त प्रकार के श्रृंगार अधूरे माने जाते हैं। एक चुटकी भर सिंदूर से दो लोग जन्मों के साथी बन जाते हैं। ( कल पढ़े श्रृंगार नंबर 6 के बारे में)













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