सावन विशेष : नथुनिए पे गोली मारे...
दोस्तों, हम लगातार आपको महिलाओं के सोलह श्रृंगार के बारे में बता रहे हैं । जानी मानी पत्रिका 'एराउंड द इंडिया' के मई अंक में छपे लेख सोलह श्रृंगार की महत्ता की लेखिका कुमद मेहरोत्रा ने इस विषय पर गहन अध्ययन किया है, जिसके बाद उन्होंने अपनी लेखनी से श्रृंगार का महत्व समझाया है।
कल हमने आपको श्रृंगार नंबर 3 काजल के बारे में, आज हम आपको बताते हैं श्रृंगार नंबर 4 के बारे में, जिसें हम नथुनी कहते हैं। नाक में पहना जाने वाला यह आभूषण अपनी अपनी परंपरा व रस्मों रिवाज में छोटा-बड़ा होता है। यह रक्त संचार को ग्रीवा भाग में स्थित करवाता है इसलिए कील या नथुनी के रूप में जीवन पर्यन्त इस आभूषण को धारण करना एक सुहागन के लिए अति आवश्यक माना गया है।
वैसे भी कहते हैं कि बिना नथ के कोई दुल्हन पूरी नहीं होती हैं। आजकल लड़कियां नाक नहीं छिदवाती हैं लेकिन शादी के दौरान नथ को पहनना काफी जरूरी होता है, इसलिए बाजार में स्प्रिंग वाली नथ का चलन काफी बढ़ गया है। फिल्म वीर-जारा के बाद से लड़कियों में एक बार फिर से नथ के प्रति लगाव देखा गया है। खैर एक बात तो सही है कि बिना नथ के कोई श्रृंगार अधूरा है। ( कल पढ़े श्रृंगार नंबर 5 के बारे में)













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