दिग्विजय जी आपके निशाने पर सिर्फ अन्ना ही क्यों?

दिग्विजय सिंह ने अन्ना हजारे को अनशन पर नहीं जाने की सलाह दे डाली। दिग्विजय ने कहा कि अन्ना हजारे पीप्ली लाइव के नत्था ना बनें तो अच्छा होगा। खैर दिग्विजय ने जो कहा सो कहा, अब सवाल यह उठता है कि दिग्विजय सिंह को जितनी चिंता लोकपाल विधेयक की है, क्या उतनी चिंता उत्तर प्रदेश में सीएमओ हत्याकांड में डा. बीपी सिंह, डा. आर्या और डा. सचान के परिवारों को न्याय दिलाने की है।
क्या दिग्विजय सिंह को मध्य प्रदेश में बाढ़ पीडि़तों को लेकर किसी प्रकार की चिंता है? क्या उत्तर प्रदेश में हो रहीं बलात्कार की वारदातों को लेकर कोई चिंता है? क्या उन्हें बिहार, छत्तीसगढ़ या अन्य किसी राज्य की चिंता है? इन सबके जवाब हैं नहीं। क्योंकि इन राज्यों में कुछ भी हो कांग्रेस को फर्क नहीं पड़ने वाला।
हम ज्यादा पीछे नहीं जायेंगे सीएमओ हत्याकांड के आरोपी डा. सचान की लखनऊ जेल में संदिग्ध मौत के मामले पर मीडिया से मुखातिब होने पर दिग्विजय एक भी जगह आक्रामक नहीं दिखे। उन्होंने सिर्फ इतना कहा, कि इस मामले की सीबीआई जांच होनी चाहिये। अगर दिग्विजय सिंह को डा. सचान के परिवार से इतनी ही हमदर्दी है, तो वो सीबीआई जांच की मांग करने के लिए खुलकर आगे क्यों नहीं आये।
यह सब इसलिए क्योंकि यूपी में कुछ भी अच्छा हो या बुरा, फर्क सिर्फ मायावती सरकार को पड़ेगा, लेकिन अगर अन्ना हजारे ने एक कदम भी आगे बढ़ाया तो उसका सीधा असर केंद्र में कांग्रेस गठबंधन वाली संप्रग सरकार को पड़ेगा। वैसे एक तरह से देखा जाये तो दिग्विजय सिंह राजनीति में सिर्फ एक मुखपत्र की तरह सक्रिय रहते हैं। उन्हें सिर्फ बोलने से मतलब है।
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