लखनऊ में किन्नरों के आतंक से जनता परेशान

किन्नरों के आतंक से परेशान राजधानी वासियों की मांग नगर निगम तक पहुंच गयी है। एक स्वयं सेवी संस्था ने नगर निगम कार्यकारिणी के सामने प्रस्ताव पेश किया किन्नरों का नेग तय किया जाए। संस्था का कहना है कि जब तक ऐसा नहीं होगा किन्नरों की मनमानी चलती रहेगी और वह जनता का शोषण करते रहेंगे। नगर निगम को मिले प्रस्ताव में कहा गया कि किन्नरो की नेग 101 रुपये से 501 रुपये तक होनी चाहिए ताकि आम आदमी यह रकम आसानी से दे सके। जबकि किन्नरों की हकीकत इससे बहुत अलग है। नाचने गाने वाले किन्नर अब वसूली पर अधिक ध्यान देते हैं।
ज्ञात हो कि पिछले तीन चार साल से किन्नर नेग के नाम पर लोगों से जमकर धन उगाही कर रहे हैं। मनमाने पैसों की मांग पूरी न होने पर किन्नर मारपीट पर उतारू हो जाते हैं। लखनऊ पुलिस के दस्तावेजों में कई ऐसी घटनाएं दर्ज हैं जब किन्नरों ने शादी विवाह समारोह से लेकर बाजारों में वसूली के लिए उपद्रव किया। कभी पचास व सौ रुपये ले नाच गाकर अपनी जीविका चलाने वाले किन्नर अब दबंग हो चले हैं।
हालात यह हैं कि किन्नर मारपीट व साप्ताहिक वसूली तक में लिप्त हो गए हैं। पारिवारिक समारोह में यदि किन्नर आ गए तो वे सौ पचास रुपये लेकर वापस नहीं जाते। उनकी मांग सुनकर आम आदमी के होश उड़ जाते हैं। किन्नरों की मांग पर 5,000 रुपये से शुरू होकर 50,000 रुपये तक पहुंची जाती है जिसे दे पाना आम आदमी के बस में नहीं होता।
किन्नरों की गतिविधियों व कार्यशैली की बात करें तो इन दिनों राजधानी लखनऊ में किन्नरों को तीन समूह (गिरोह) हैं। इन्होंने शहर को तीन हिस्सों में बांट रखा है समूह के सदस्य अपने ही इलाके में कार्य करते हैं। गिरोह के वरिष्ठ सदस्य नेग की बजाय बाजार में साप्ताहिक वसूली पर निकलते हैं। शहर के व्यस्ततम बाजार लालबाग में चमचमाती आलीशान गाड़ी से उतरने वाले किन्नर को देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता है कि उसे किसी बात की कमीं होगी।
स्वर्ण जेवरातों से लदे इस किन्नर के गुर्गे दुकानदारों से पांच सौ से एक हजार रुपये की वसूली करके वापस चले जाते हैं। यदि किसी ने पैसे देने से इनकार किया तो उसे गालियों के दो चार होना पड़ता है विरोध बढ़ा तो मारपीट होने में देर नहीं लगती। इन हकीकतों को जानने के बाद भी पुलिस प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता है।
उधर नगर निगम को दिए प्रस्ताव में स्वयं सेवी संस्था ने किन्नरों का नेग तय करने की मांग करी। प्रस्ताव में नेग 501 रुपये तय किए जाने का कहा गया है लेकिन उपरोक्त हकीकत यह बताने को काफी है कि राजधानी में किन्नरों का दबदबा किस कदर हावी है और वे क्या कर रहे हैं।
;











Click it and Unblock the Notifications