पत्रकार की मौत में हाथ नहीं : आईएसआई

पत्रकार की मौत में हाथ नहीं : आईएसआई
पत्रकार सलीम शहज़ाद ने पाकिस्तानी नौसेना और अल कायदा के संबंधों के बारे में हाल ही में एक लेख लिखा था.

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पाकिस्तान की खुफ़िया एजेंसी आईएसआई के एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए बयान जारी कर के पत्रकार सलीम शहज़ाद की हत्या में कोई हाथ होने से इंकार किया है. सलीम शहजा़द रविवार को लापता हो गए थे जिसके बाद मंगलवार को उनकी लाश मिली. शहज़ाद ने पाकिस्तानी नौसेना और अल क़ायदा के संबंधों पर एक रिपोर्ट लिखी थी.

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शहज़ाद को बुधवार को कराची में दफनाया गया. 40 वर्षीय शहजा़द अपने घर से एक टीवी शो में हिस्सा लेने के लिए निकले थे लेकिन उसके बाद उनका कोई अता पता नहीं मिल सका था. शहज़ाद पाकिस्तान में इस्लामी चरमपंथियों के नेटवर्कों के बारे में लिखते रहे थे और उन्होंने मानवाधिकार संगठनों को चेताया था कि उन्हें पाकिस्तानी खुफ़िया एजेंसी से धमकियां मिली हैं.

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इन खबरों के छपने के बाद आईएसआई पर शहज़ाद की हत्या करने की शंका व्यक्त की जा रही थी जिसके बाद आईएसआई ने ऐसा बयान जारी किया है. पत्रकारों का कहना है कि आईएसआई का इस तरह का बयान जारी करना सबको आश्चर्य में डाल रहा है. आईएसआई ने अपने बयान में कहा है कि ''इस तरह की घटनाओं का इस्तेमाल देश की सुरक्षा एजेंसी को बदनाम करने के लिए नहीं किया जाना चाहिए.""

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आईएसआई के एक अधिकारी ने समाचार एजेंसी एपी से कहा, '' देश की खुफ़िया एजेंसी के बारे में ऐसे आधारहीन आरोप लगाना कि वो शहज़ाद की हत्या में शामिल है, बिल्कुल बेबुनियाद है. कोई सबूत नहीं है. जांच चल रही है. मीडिया में इस तरह के आरोप बिल्कुल गैर पेशेवराना है.""

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अधिकारी का कहना था कि उन्हें शहज़ाद के परिवार से पूरी सहानुभूति है और उन्होंने आश्वासन दिया कि शहज़ाद के हत्यारों को पकड़ा जाएगा. पाकिस्तान मीडिया को चेतावनी देते हुए आईएसआई के अधिकारी ने कहा कि मीडिया को आईएसआई के ख़िलाफ़ बेबुनियाद आरोप लगाने से बाज़ आना चाहिए. लाहौर, कराची और पेशावर में मीडियाकर्मियों ने शहज़ाद की मौत के बाद धरने दिए हैं और प्रदर्शन किए हैं.

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पाकिस्तान सरकार ने शहज़ाद की मौत की छानबीन की घोषणा कर दी है. बीबीसी के पत्रकार सैयद शोएब हसन कराची में शहज़ाद के जनाज़े में शामिल थे. हसन का कहना है कि सरकार ने अभी तक शहज़ाद की मौत की परिस्थितियों के बारे में कोई टिप्पणी नहीं की है और शहज़ादी की लाश मिलने के तुरंत बाद प्रधानमंत्री यूसुफ रज़ा गिलानी की तरफ से एक बयान जारी किया गया है.

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गिलानी के बयान में कहा गया है कि शहज़ाद की हत्या करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि शहज़ाद के जनाज़े में सरकार का कोई प्रतनिधि शामिल नहीं था लेकिन शहज़ाद को निजी तौर पर जानने वाले विपक्ष के कई नेता और अधिकारी जनाज़े में शामिल थे.

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शहज़ाद की लाश इस्लामाबाद से 150 किलोमीटर दूर मिली थी और पुलिस के अनुसार उनका टार्चर किया गया था. पोस्ट मार्टम करने वाले डॉक्टर के अनुसार शहज़ाद की मौत टार्चर के कारण ही हुई थी और उनके चेहरे और शरीर पर कई निशान थे जिससे पता चलता है कि उनको बुरी तरह मारा पीटा गया था. पोस्ट मार्टम रिपोर्ट के अनुसार शहज़ाद के शरीर पर टार्चर के 15 गहरे घाव थे और गोली का कोई निशान नहीं था.

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