'पाक को ओसामा की जानकारी नहीं थी'

पाकिस्तान की यात्रा पर पहुँची हिलेरी क्लिंटन ने प्रधानमंत्री यूसुफ़ रज़ा गिलानी और राष्ट्रपति आसिफ़ अली ज़रदारी सहित सरकार के कई प्रमुख मंत्रियों से चर्चा की है. इस चर्चा के बाद उन्होंने कहा है कि पाकिस्तान सरकार को चरमपंथ से निपटने के लिए और क़दम उठाने की ज़रुरत है.
;इस यात्रा में उनके साथ अमरीकी सेना के प्रमुख एडमिरल माइक मुलेन पहुँचे हैं. उल्लेखनीय है पहली और दूसरी मई की दरम्यानी रात अमरीकी सेना ने इस्लामाबाद से कुछ दूरी पर स्थित ऐबटाबाद में कार्रवाई करके अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन को मार दिया था. इसके बाद हिलेरी क्लिंटन की ये पहली पाकिस्तान यात्रा है.
;ओसामा के मारे जाने के बाद से ये विवाद चल रहा था कि ये कैसे संभव है कि पाकिस्तानी सेना के प्रशिक्षण केंद्र से कुछ मीटर की दूरी पर ओसामा बिन लादेन पाँच साल से रह रहे हों और ये पाकिस्तानी अधिकारियों को पता न हो. हालांकि इससे पहले एडमिरल माइक मुलेन भी कह चुके हैं कि पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों को ओसामा की मौजूदगी की जानकारी नहीं थी.
;हिलेरी क्लिंटन ने इस्लामाबाद में मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ओसामा बिन लादेन के मारे जाने के बाद पाकिस्तान और अमरीका के संबंध एक नए मोड़ पर हैं और अब चरमपंथ से निपटने के लिए पाकिस्तान को निर्णायक क़दम उठाने होंगे. उनका कहना था कि पाकिस्तान की समस्याओं को अमरीका हल नहीं कर सकता.
;उन्होंने कहा, "षडयंत्र की बातों से और अमरीका पर आरोप लगाने से पाकिस्तान की समस्याएँ ख़त्म नहीं होने वाली हैं." अमरीकी विदेश मंत्री का कहना था कि पाकिस्तान की समस्याएँ हल करने के लिए पाकिस्तान के नेताओं को ही क़दम उठाने होंगे. दोनों देशों के बीच ओसामा के ख़िलाफ़ ऐबटाबाद में कार्रवाई के बाद तनाव इसलिए बढ़ा क्योंकि पाकिस्तान ने किसी जानकारी के बिना उसकी भूमि पर अमरीकी कार्रवाई को 'संप्रभुता का उल्लंघन' कहते हुए इस पर आपत्ति जताई थी.
;उधर अमरीका में अनेक राजनीतिक नेताओं ने इस बात पर आश्चर्य जताया था कि ओसामा बिन लादेन बिना किसी पाकिस्तानी अधिकारी या संस्था की जानकारी के इतने साल ऐबटाबाद में पाकिस्तानी सैन्य अकादमी के इतने नज़दीक कैसे रह सकते थे. महत्वपूर्ण है कि गुरुवार को ही अमरीका की सेना ने पाकिस्तान से अपने कई सैनिकों को हटाने की घोषणा की थी. पेंटागन का कहना है कि पाकिस्तानी सरकार ने उससे अनुरोध किया है कि वह उनके देश में अपनी उपस्थिति को कम करे.
;पेंटागन के प्रवक्ता ने कहा कि पिछले दो सप्ताहों में पाकिस्तान ने अमरीकी सेना से कहा है कि वहाँ अपनी मौजूदगी को कम करे और अमरीका ने कुछ सैनिकों को वापस बुलाने का फ़ैसला कर उनकी बात मान ली है. हालाँकि वापस बुलाए गए सैनिकों की संख्या काफ़ी कम है. अमरीका के पाकिस्तान में 200 से ऊपर सैनिक हैं जो पाकिस्तानी सेना को प्रशिक्षण देने में सहायता दे रहे हैं. इनमें से ही कुछ सैनिक वापस लौटेंगे.












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