घर के भेदी जवाहिरी ने ढा़ह दी ओसामा बिन लादेन की लंका

जवाहिरी मिस्त्र में अलकायदा के गुट का नेतृत्व करता था और 2004 में ओसामा के बीमार होने के बाद से ही अलकायदा पर पूरा नेतृत्व चाहता था। अखबार के अनुसार, जिस संदेशवाहक के जरिये अमेरिकी बल ओसामा तक पहुंचे, वह जवाहरी के प्रति अधिक वफादार था। न्यूज चैनल के हवाले से प्राप्त जानकारी के अनुसार संदेशवाहक एक पाकिस्तानी नागरिक था बल्कि कुवैती नहीं जैसा कि अमेरिका को संदेह था। संदेशवाहक को पता था कि अमेरिकी जासूसों द्वारा उसका पीछा किया जा रहा है, लेकिन उसने इस तथ्य की अवहेलना की।
अखबार ने यह भी दावा है कि अखबार का दावा है कि यह जवाहिरी गुट का था जिसने ओसामा को अफगानिस्तान-पाकिस्तान सीमा के पास के इलाके से एबटाबाद जाने के लिए मनाया। अवलाकी लेगा ओसामा.. दुनिया के सर्वाधिक वांछित आतंकियों में से एक अवलाकी अमेरिका पर 11 सितंबर 2001 के आतंकी हमले की साजिश में शामिल था। ब्रिटिश अखबार द सन को भेजे ई-मेल में उसने कहा है, तुमने जिस तरह से अमेरिकी ऑपरेशन में सहयोग किया है उसका खामियाजा तुम्हें बमबारी के रूप में चुकाना होगा। हम भीड़भाड़ वाली जगहों पर नरसंहार करेंगे।
उसके संदेश से लगता है कि उसकी योजना मुंबई पर 2008 में हुए हमले को दोहराने की है। वहीं दूसरी तरफ पाकिस्तान के पत्रकार रईमुल्ला जहीर, जो दो बार ओसामा से मिल चुके थे, ने बताया कि ओसामा कभी भी अमेरिकी सेना के हाथ नहीं आना चाहता था। ओसामा ने अपने सभी साथियों से कह दिया था, कि अगर ऐसी स्थिति आये कि मैं अमेरिकी सेना के बीच घिर जाऊं तो मुझे गोली मारने में एक मिनट का वक्त भी मत लगाना। वही अल वतन का दावा है कि लादेन ने अपनी वसीयत में कहा था कि वह अपने किसी बेहद करीबी के धोखा देने से ही मारा जाएगा। अगर सऊदी न्यूजपेपर अलवतन का यह दावा सच है तो लादेन का शक सच में बदल गया और करीबी ने ही उसके पीठ में छूरा भोंख दिया।












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