ऑनर कीलिंग के खिलाफ विधेयक मानसून सत्र में

दिल्‍ली। सम्मान के लिए हत्या के खिलाफ विधेयक जुलाई में संसद के मानसून सत्र के दौरान पेश किया जा सकता है। यह बात राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) की अध्यक्ष गिरिजा व्यास ने बुधवार आयोजित एक प्रेस कांफ्रेंस में कहा। उन्‍होनं कहा कि मुझे लगता है कि विधेयक मानसून सत्र में पेश होगा। चूंकि मंत्री समूह (जीओएम) ने इसे मंजूरी दे दी है, लिहाजा अब इसमें कोई बाधा नहीं है। सम्मान एवं परम्परा के नाम पर अपराधों की रोकथाम शीर्षक वाला यह विधेयक खाप पंचायतों के सदस्यों के लिए हत्या के बराबर कठोर दंड का प्रस्ताव करता है। ये पंचायतें ही सगोत्री या दूसरी जाति में शादी करने वाले महिलाओं व पुरुषों की हत्या के आदेश देती हैं या हत्या के लिए उकसाती हैं।

विधेयक में खाप पंचायत सदस्यों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई के लिए भारतीय दंड संहिता, भारतीय साक्ष्य अधिनियम और विशेष विवाह अधिनियम में संशोधन का प्रस्ताव है। केंद्रीय वित्त मंत्री प्रणब मुखर्जी की अध्यक्षता वाले मंत्री समूह में केंद्रीय गृह मंत्री पी.चिदम्बरम, कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली, महिला एवं बाल विकास मंत्री कृष्णा तीरथ और मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल शामिल हैं। व्यास ने कहा, परिवार व समुदाय के सदस्यों द्वारा परिवार व खानदान की इज्जत के नाम पर अपने ही प्रियजनों की हत्या जैसे संगीन अपराधों के लिए यह विधेयक एक बड़ा अवरोधक होगा। कुछ सांसदों और कांग्रेसी नेताओं द्वारा खापों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर आपत्ति किए जाने के बारे में पूछने पर व्यास ने कहा, मैं मानती हूं कि मंत्री समूह ने इस मुद्दे के सभी पक्षों पर विचार किया है।

मुख्य मुद्दा उन महिलाओं व पुरुषों की सुरक्षा व आजादी का था, जो अपनी शादी के बारे में निर्णय लेते हैं। व्यास ने कहा, किसी जाति या कुल के गौरव व इज्जत को बचाने के लिए हिंसा व क्रूरता कोई तरीका नहीं है। गैर सरकारी संगठनों व सामाजिक कार्यकर्ताओं के अनुसार प्रतिवर्ष सम्मान के लिए हत्या के लगभग 1,000 मामले सामने आते हैं। यद्यपि अधिकांश घटनाएं हरियाणा, पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पंजाब में घटती हैं, लेकिन कुछ घटनाएं दिल्ली सहित अन्य राज्यों में भी सामने आती हैं।करनाल की एक जिला अदालत ने एक ऐतिहासिक फैसले में मार्च 2010 में पांच व्यक्तियों के खिलाफ मौत की सजा सुनाई थी।

इन सभी पर हरियाणा में कैथल जिले के करोरा गांव में बबली व मनोज नामक एक दम्पति की 2007 में हत्या करने का आरोप था। पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने हालांकि पिछले महीने दोषियों के मृत्युदंड को 20 वर्षो के कारावास में तब्दील कर दिए।व्यास ने कहा कि एनसीडब्ल्यू एक नए विधेयक के लिए दबाव बनाने के साथ ही सम्मान के लिए हत्या के खिलाफ सामाजिक जागरूकता कार्यक्रम चलाता रहा है।

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