खतरे में दुनिया की 75 फीसदी मूंगा चट्टानें : रिपोर्ट

समाचार एजेंसी 'सिन्हुआ' के मुताबिक 'रिफ्स एट रिस्क रिविजिटेड' नाम से यह रिपोर्ट वर्ल्ड रिसोर्सेज इंस्टीट्यूट (डबल्यूआरआई) ने नेचर कंजरवेंसी, द वर्ल्ड फिश सेंटर और 25 अन्य संस्थानों के साथ सहयोग से जारी किया है।

रिपोर्ट में बताया गया है कि समुद्र से अत्यधिक मात्रा में मछलियां पकड़ने, तटीय विकास, प्रदूषण, तापमान में बढ़ोतरी और पानी का ज्यादा खारा होने की वजह से मूंगे की चट्टानों को खतरा पैदा हो गया है।

अमेरिका की राष्ट्रीय सामुद्रिक और वातावरणीय प्रशासन के प्रमुख जेन लुबकेंको ने कहा, "यह रिपोर्ट नीति निर्माताओं, कारोबारी शख्सियतों, सामुद्रिक प्रबंधकों और दूसरे लोगों के लिए चेतावनी है कि वे मूंगा चट्टानों के बचाव के लिए तुरंत कदम उठाएं।"

उन्होंने कहा, "रिपोर्ट से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन सहित स्थानीय और वैश्विक खतरों का प्रभाव मूंगे की चट्टानों पर पड़ा है। इससे इस खूबसूरत और कीमती पारिस्थतिकी घटक खतरे में पड़ गया है।"

उन्होंने बताया कि स्थानीय दबावों..खासतौर से अत्यधिक और विनाशकारी तरीके से मछली पकड़ने की वजह से मूंगा चट्टानों पर खासा असर पड़ रहा है। वहीं, वैश्विक दबावों के चलते समुद्र का तापमान और उसमें प्रदूषण की मात्रा बढ़ रही है।

नए अध्ययन के मुताबिक अगर इस पर रोक नहीं लगाई गई, तो 2030 तक 90 फीसदी चट्टानें खतरे में होंगी और 2050 तक सभी चट्टानों के अस्तित्व पर संकट उत्पन्न हो जाएगा।

वर्ल्ड रिसोर्स इंस्टीट्यूट में सीनियर एसोसिएट लॉरेटा बर्क का मानना है कि मूंगा चट्टानें दुनिया भर में लाखों लोगों के लिए बहुमूल्य संसाधन हैं। हालात खराब होने के बावजूद उम्मीद की किरण भी है। उनके मुताबिक स्थानीय दबावों को कम करके इस समस्या का हल निकल सकता है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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