सबसे पहले अपनी कमजोरियों को पहचानिए

एक दिन उससे रहा न गया। वह भिखारी के पास गया और बोला, "बाबा तुम्हारी ऐसी हालत हो गई है, फिर भी तुम भीख मांगते हो। ईश्वर से यह प्रार्थना क्यों नहीं करते कि वह तुम्हें अपने पास बुला ले?" भिखारी उसकी बात सुनकर कुछ नहीं बोला। युवक ने दूसरी बार फिर कहा, "बाबा, मेरी बात का जवाब क्यों नहीं देते?"
भिखारी बोला, "भैया, तुम जो कह रहे हो, वही बात मेरे मन में भी उठती है। इसलिए मैं भगवान से बराबर प्रार्थना करता हूं कि मुझे उठा ले, लेकिन वह मेरी सुनता ही नहीं।"
उसने आगे कहा, "जवानी में मैं बहुत धनवान था। मुझे अपने धनी होने का बहुत गुमान था। मैं अहंकार में किसी का भी अपमान कर देता था और गलत काम करने से भी नहीं चुकता था। शायद इसीलिए ईश्वर चाहता है कि मैं इस धरती पर रहूं, ताकि लोग मुझे देखें और सोचें कि ऐसा दिन भी आ सकता है, जब हम इस भिखारी की तरह हो सकते हैं।"
इसलिए अपनी कमजोरियों को पहचानिए और इन गुरुमंत्रों को दिल में उतारिए :
* जीवन में कभी दु:ख न आए, यह प्रार्थना करना कायरता की निशानी है, लेकिन दु:ख और कठिनाइयों में मनोबल बना रहे, यह प्रार्थना हौसला बढ़ाती हैं और सफलता का रास्ता दिखाती है।
* जब आप अपनी कमजोरियों को पहचानना शुरू कर देंगे, तब आपका दिमाग पूरी तरह से सकारात्मक हो जाएगा।
* कामयाब लोग अच्छी आदतें अपनाते हैं और अपनी कमजोरियों पर नियंत्रण रखते हैं। फिर यह तय करते हैं कि उनके व्यवहार पर उन अच्छी आदतों का नियंत्रण कितना है?
* जो बीत गया सो बीत गया, इसलिए पीछे मुड़कर कभी मत देखिए, क्योंकि पीछे मुड़कर देखने से सफलता का रास्ता लंबा हो जाता है।
* असफलता एक छूत की बीमारी है, जिसके कीटाणु हाथ मिलाते ही शरीर में प्रवेश कर जाते हैं। इसलिए असफल लोगों से हाथ मिलाने से बचिए।
* अति आत्मविश्वास वाले व्यक्ति अच्छे उद्यमी साबित नहीं होते, जबकि सकारात्मक सोच वाले व्यक्ति तेजी से तरक्की करते हैं।
* असफलता एक परीक्षा है, जो रुक नहीं सकती, क्योंकि असफलताएं ही आपको सुधार का रास्ता दिखाती हैं।
* दु:ख जिंदगी का एक हिस्सा है, यह आता है और जाता भी है, पर निराश होने पर दु:ख स्थायी हो जाता है।
* जिस काम को करने से आप डरते हैं, वही काम कीजिए। फिर डर आपसे डरकर भाग जाएगा।
* इच्छा-शक्ति सफलता का पहला किनारा है और किनारे पर जितनी कमजोर लहरें होंगी, किनारा उतना ही बदबूदार होगा। ठीक वैसे ही जितनी कमजोर आपकी इच्छाएं होंगी, परिणाम भी उतने ही कमजोर मिलेंगे।
* एक असफलता की निराशा में दूसरे अवसर की अनदेखा नहीं करना चाहिए, क्योंकि असफलताओं के बाद ही सफलता प्राप्त होती है।
* जब आप डरते हैं, तो डर आपको और डराता है, लेकिन जब आप डर को डराते हैं, तब डर आपको अपनाता है।
(डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली द्वारा प्रकाशित पुस्तक 'सीक्रेट्स ऑफ सक्सेस' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस












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