आपके काम में झलकनी चाहिए लगन

जोगिन्दर सिंह

नई दिल्ली, 8 फरवरी (आईएएनएस)। कई बार लोग पूछते हैं कि प्रसन्नता क्या है? आप अपने जीवन के बारे में अच्छा महसूस करते हैं, आपको लगता है कि आप अपनी मंजिल की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं तो आपको प्रसन्नता या खुशी होती है। उद्देश्य तय करके वहां तक पहुंचने का अहसास आपको प्रसन्नता प्रदान करता है।

मैंने नोट किया कि रिटायरमेंट के बाद एक दिन भी यदि मैं कोई लक्ष्य बनाकर, उसे पाए बिना ही दिन गुजार देता था तो मुझे असंतुष्टि महसूस होती थी। लक्ष्य छोटे और सामान्य भी हो सकते हैं, जैसे बैंक से पैसे निकालने जाना या किसी को खत लिखना आदि।

मगर आपने छोटे मुद्दों पर ध्यान नहीं दिया तो हो सकता है कि खास मुद्दों पर काम करते समय आपको अपराध बोध हो कि आपने जीवन की छोटी-छोटी बातों को नजरअंदाज क्यों किया। आप जीवन से जो भी पाना चाहते हैं, उसी के अनुसार अपना लक्ष्य बनाएं। यदि अगर आपके जीवन में कोई लक्ष्य नहीं है तो वह दुखों का घर बन जाएगा।

जीवन का उद्देश्य तय करके उसे पाने में ही सच्ची प्रसन्नता छिपी होती है। एक प्रसन्न व्यक्ति अपने दुख और दुर्भाग्य को बहुत पीछे छोड़ देता है। ऐसा नहीं है कि वह असफल नहीं होता। उस सकारात्मक प्रसन्न व्यक्ति की खासियत यही होती है कि वह उस सफलता को स्थायी नहीं मानता।

हम लोग अक्सर छोटी-छोटी बातों पर चिंतित हो उठते हैं। एक बार सुबह चहलकदमी के लिए जाते समय मुझे पता चला कि गार्ड से उस द्वार के ताले की चाबी खो गई, जिसमें मुझे प्रवेश करना था। मैंने गुस्से से भरकर उसे पांच मिनट में चाबियां खोजने का आदेश दे दिया लेकिन मैं जानता था कि यदि चाबियां न मिलीं तो मैं उससे ताला तुड़वा दूंगा।

अक्सर अपने उद्देश्य तक पहुंचने के लिए आपको अपनी सीमा से कहीं ज्यादा काम करना पड़ता है, अपने सपनों को साकार करने के लिए वो सब करना पड़ता है जो आप अपनी दिनचर्या में नहीं करते। भगवान ने हम सबको कोई न कोई हुनर दिया है। हमें अपने कामों में उस हुनर का भरपूर इस्तेमाल करना चाहिए।

प्रसन्नता पाने के लिए बहुत जरूरी है कि जो भी करें, प्यार से करें। काम को बोझ या सजा न मानें। आपके काम में आपकी लगन झलकती है। अपने आप से पूछें कि क्या करने से आपको खुशी मिलती है? अगर आप थोड़ा-सा ध्यान दें तो अपने दिल से ही पूछ सकते हैं कि कौन-सा काम करने से आपको आनंद आता है।

अगर आप यह नहीं जानते कि आपको जीवन में क्या करना है तो आप हमेशा एक बेचैनी और उदासी से घिरे रहेंगे। अगर आप यही नहीं जानते कि क्या करना है तो आप इस पृथ्वी पर क्या कर रहे हैं? कुछ लोग तो जानना ही नहीं चाहते कि उन्हें क्या चाहिए। उनके दु:ख, पीड़ा, परेशानी व संदेह उन्हें आगे ही नहीं बढ़ने देते। यह जरूरी नहीं होता कि आपको पहली ही बार में किसी काम में सफलता मिल जाए। सफलता और असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं। असफलता को जाने बिना हम सफलता का स्वाद नहीं चख सकते।

(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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