धन के मामले में रहिए सावधान
नई दिल्ली, 5 फरवरी (आईएएनएस)। अपने सिर कभी कोई कर्ज न रहने दें। मैंने पांच साल तक प्रतिमाह सौ रुपये बैंक में जमा करवाया और फिर उसे फिक्स डिपॉजिट करवा दिया। आज 25 साल बाद वह 25000 बन गया। इसे एक पेंशन स्कीम की तरह, जितनी जल्दी हो सके, शुरू कर लें। आप इस मामले में वित्तीय सलाहकार की मदद ले सकते हैं। भारत में संपत्ति की खरीद-फरोख्त भी अच्छा निवेश है। जो संपत्ति आप लाखों में खरीदते हैं, वह कुछ साल बाद करोड़ों में पहुंच जाती है।
बिलों का भुगतान आसान बनाएं :
हर व्यक्ति प्रतिदिन या प्रतिमास कुछ खरीदता है, जिनके बिलों का भुगतान करना पड़ता है। बिलों के भुगतान को आसान व व्यवस्थित बनाए रखना बहुत जरूरी है। अपने क्रेडिट कार्ड की रसीदों और भुगतान न किए गए बिलों को एक निश्चित स्थान पर रखें। इन्हें आप किसी फाइल में भी लगा सकते हैं। मेरी बेटी उन्हें एक लिफाफे में रखना पसंद करती है। मेरे पास एक पारदर्शी फोल्डर है ताकि बिल और रसीदें दिखाई देते रहें।
बिलों के भुगतान के लिए अपने कमरे में किसी कैलेंडर पर निशान लगाएं। भारत में ज्यादातर भुगतान नकद में ही होते हैं, हालांकि युवा पीढ़ी क्रेडिट कार्डो का इस्तेमाल करने लगी है। मैं तो उतना ही खर्च करना पसंद करता हूं, जितना मेरी जेब में हो। महीने में एक या दो दिन तय कर लें, जब आप सारे बिलों का भुगतान करेंगे।
अगर आपको बहुत सारे बिलों का भुगतान करना पड़ता है तो उनके निश्चित दिनों को कैलेंडर पर मार्क कर लें। आप उन्हें एक दिन पहले भी भुगतान कर सकते हैं, ताकि ऐसा सारा काम एक दिन में ही हो जाए। कुछ लोग तो अब थोड़े से रुपयों के बदले बिल भरने की सुविधा भी देने लगे हैं।
जिनके पास समय की कमी रहती है, ऐसे लोगों को भी ये सेवाएं भी देने लगे हैं। इन्हें भुगतान करना न भूलें। बिलों पर लिखी राशि पर निशान लगा दें। इनके पास ही पैन, चेकबुक, कैलकुलेटर, स्टेपलर व क्रेडिट कार्ड की रसीदें आदि रखे रहें। अगर जगह की कमी हो तो यह सारा सामान एक छोटे से डिब्बे में भी रख सकते हैं।
क्रेडिट कार्ड का भुगतान करते समय सावधान रहें, क्योंकि देरी करने से आपको जुर्माना भरना पड़ सकता है। मेरे साथ भी कई बार ऐसा हुआ, मैं सही समय पर भुगतान नहीं कर पाया क्योंकि काम काफी ज्यादा था, नतीजतन मुझे जुर्माना भरना पड़ा। अब मैं बड़ा ध्यान रखता हूं। मिसाल के तौर पर मुझे अब भी याद है कि मैंने हाउस टैक्स का भुगतान करना है जिसके लिए समाचार-पत्र में सार्वजनिक सूचना छप चुकी है।
कंप्यूटर में भी आप इसे नोट कर सकते हैं। इससे समय की काफी बचत होगी और आपके पास रिकॉर्ड भी रहेगा, क्योंकि भारत जैसे देश में दिल्ली नगर निगम कमेटी ने हम पर 1988 और 2004 में अतिरिक्त भुगतान लाद दिया और हमें 46000 का अतिरिक्त भुगतान करना ही पड़ा, क्योंकि हमारे पास पिछले भुगतानों का रिकॉर्ड नहीं था।
भुगतान करते समय बैंक स्टेटमेंट पर भी नजर रखें। जांच लें कि आपके खाते में पर्याप्त धन है या नहीं? वैसे तो हम सब कंप्यूटरों पर पूरा भरोसा करते हैं, लेकिन धन के मामले में थोड़ा सावधान रहना चाहिए। मैं अपने सेक्रेटरी से कहकर ऐसे सारे दस्तावेजों को कंप्यूटर में रिकॉर्ड करके सीडी बना लेता हूं।
महंगी चीजों जैसे फ्रिज, टीवी व म्यूजिक सिस्टम आदि पर वारंटी होती है। वारंटी का समय समाप्त होने तक उसकी रसीद संभालना जरूरी होता है। अगर उसका बीमा किया गया है तो उसकी रसीद संभालना जरूरी हो जाता है। मैं निजी खास प्रपत्रों को बैंक के लॉकर में रखता हूं। इन सबकी फोटो कॉपी भी अपने पास रख लें तो बेहतर होगा।
अगर कोई भुगतान डाक से होता है तो उसे समय पर भेज देना चाहिए। उन्हें आखिरी घंटे तक न टालें। भुगतान की सूचना पाते ही उसका भुगतान कर दें। मैंने खुद महसूस किया है कि देर पर हमेशा सवा देर हो जाती है। मैं इस मामले में पूरा ध्यान देता हूं, ताकि दिमाग पर बोझ न रहे। आप भी अपने लिए कोई भी कारगर तरीका खोज सकते हैं।
अगर क्रेडिट कार्ड से भुगतान हो जाए और आपके बैंक से वह रकम निकल जाए तो ऐसे बिलों को संभालकर बिखराव न बढ़ाएं। कुछ कागजों के अलावा बाकी ऐसी सारी रसीदें नष्ट कर दें। भारत के बड़े शहरों में बैंक आपके बिलों के भुगतान की सुविधा देता है और आपके पास समय-समय पर उनकी स्टेटमेंट आती रहती है। इस तरह आप समय गंवाने और चेक भरने के झंझट से बच जाते हैं।
कुछ लोग बिलों का भुगतान इंटरनेट से या इलेक्ट्रॉनिक तरीके से बैंक से भरना पसंद करते हैं। आपको इसके लिए बैंक को अपनी मंजूरी देनी पड़ती है। जो भी तरीका आप अपनाएं, चेकबुक में रकम अवश्य भरें। इंटरनेट से भुगतान करते समय भी जालसाजी की पूरी गुंजाइश रहती है इसलिए सोच-समझकर ही भुगतान करें।
कई डिपार्टमेंटल स्टोर भी क्रेडिट कार्ड की सुविधा देते हैं। ऐसे मुफ्त क्रेडिट कार्ड लेने से पहले सावधान रहें। सोच लें कि क्या आपको वाकई उसकी आवश्यकता है? क्रेडिट कार्डो की संख्या जितनी कम होगी, बटुए का भार घटेगा और बिलों का भुगतान आपके हाथ में सावधानीपूर्वक होता रहेगा।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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