रणनीति के विशेषज्ञ सुब्रामण्यम् नहीं रहे

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर रणनीतिक मामलों के जाने-माने विशेषज्ञ के सुब्रामण्यम् का मंगलवार को निधन हो गया. वे 82 वर्ष के थे.

विश्व में सुरक्षा के मामलों पर उनके विचारों को काफ़ी अहमियत दी जाती थी और उन्हें ध्यान से सुना जाता था.

वे कुछ समय से कैंसर से पीड़ित थे लेकिन इलाज के बाद उनकी स्थिति सुधर रही थी. मंगलवार को अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में फेफड़े और हृदय रोग से संबंधित बीमारी के कारण उनकी मृत्यु हो गई.

भारत के उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी ने के सुब्रामण्यम के निधन पर दुख व्यक्त किया है. उन्होंने अपने शोक संदेश में कहा, "के सुब्रामण्यम् भारत की सुरक्षा नीति बनाने वालों में से एक अहम निर्माता थे. भारत के पहले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड के संयोजक के नाते उन्होंने भारत की परमाणु नीति का मसौदा बनाया. करगिल रिव्यू कमेटी के चेयरमैन के रूप में महत्वपूर्ण योगदान दिया."

सुब्रामण्यम् आजकल प्रधानमंत्री की ग्लोबल स्ट्रैटेजिक डेवेलप्मेंट (यानी वैश्विक रणनीतिक परिस्थियों) पर टास्कफ़ोर्स के चेयरमैन थे.

के सुब्रामण्यम् सामरिक मामलों पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जाने-माने इंस्टीट्यूट ऑफ़ स्ट्रैटेजिक स्टजीस एंड एनेलेसिस (आईडीएसए) के निदेशक रह चके थे.

उन्हें भारत में सामिरक मामलों पर विशेषज्ञों का गुरु माना जाता है. भारत की लगभग सभी सरकारें विदेश नीति से संबंधित मुद्दों और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों पर उनकी राय लेती थीं.

वे करगिल युद्ध पर पुनर्विचार करने के लिए बनी समिति के अध्यक्ष थे और उन्होंने भारत की सुरक्षा में रही कमियों और उनके हल के बारे में विस्तृत रिपोर्ट दी थी.

उनके परिवार में उनकी पत्नी के अलावा तीन बेटे और एक बेटी हैं. उनके पुत्र एस जयशंकर चीन में भारत के राजदूत हैं.

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