पहले तय कीजिए, जीवन से क्या चाहिए
नई दिल्ली, 1 फरवरी (आईएएनएस)। कोई भी संपूर्ण नहीं होता, हम सभी में स्वार्थ, लापरवाही और परपीड़ा जैसे दोष छिपे रहते हैं। अपनी सकारात्मक विशेषताओं पर ध्यान देते समय बुराइयों को भी नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। आपको अपनी कमियों और अच्छाइयों, दोनों को ही मानकर प्यार देना होगा। ऐसा नहीं है कि आप इन बुराइयों को मिटा नहीं सकते या कहीं फेंक नहीं सकते।
अगर आप बुराइयों की ओर ध्यान नहीं देंगे तो इसका मतलब यह नहीं कि वे समाप्त हो गईं। पूरे अभ्यास और विश्वास के बिना उन्हें अपने आपसे अलग नहीं किया जा सकता। अगर वे आपके बाहरी आवरण में छिपी हैं तो भी वे आपके संबंधों व जीवन को प्रभावित करती हैं। इसका हल यही है कि पीड़ा व अपमान के लिए दूसरों को दोष न दें। जो भी आपका बुरा करे, उन्हें क्षमा देकर आगे बढ़ जाएं।
अगर आप अपनी कमियों के लिए दूसरों को दोषी ठहराते रहेंगे तो आपकी खुशियां छिन जाएंगी और आप बेचारे बनकर रह जाएंगे। कुछ लोग दूसरी तरह से हर कठिनाइयां पार कर जाते हैं। वे अपनी गलती न होने पर भी, दूसरों का दोष अपने सिर ले लेते हैं।
आपका जीवन, आचरण और व्यवहार आपके साथ ही शुरू होता है। आपको दूसरों के पांवों पर सिर टिकाने की कोई जरूरत नहीं है। हम सब अपने कामों के लिए पूरी तरह जिम्मेवार होते हैं, चाहे उसका नतीजा अच्छा हो या बुरा, हमें ही भुगतना पड़ता है। जीवन के हर चुनाव और उससे मिलने वाले नतीजों से हमारे जीवन की गुणवत्ता निश्चित होती है।
अगर आप अपने कामों की पूरी जिम्मेवारी लेते हैं तो आप अपने आसपास एक माहौल बना पाते हैं जहां आप अपनी इच्छा से जीते हैं। यही रवैया आपको खुशियों या उदासी की ओर ले जाता है। पंजाबी में एक कहावत है 'जिन्ना गुड़ पाओग, ओना ही मीठ्ठा' (पानी में जितना गुड़ डालोगे, वह उतना ही मीठा होगा)।
कई बार हम अपनी खुशियों को नजरअंदाज करके दूसरों की खुशी के लिए उनकी राय मान लेते हैं। अपना पसंदीदा कॅरियर चुनकर आप बुलंदियों तक जा सकते हैं। अपने काम से प्यार करेंगे तो इसका नतीजा सबसे अनूठा ही होगा। आपको लगेगा कि जीवन की बागडोर आपके हाथ में है। यहां आपका अपना विश्वास कहीं ज्यादा मायने रखता है। आपके विश्वास का खुशियों से गहरा नाता है। आपके नजरिए और मानसिकता पर ही जीवन को प्रसन्नता टिकी है। हमेशा याद रखें कि आप अपने जीवन से क्या चाहते हैं यह तय करें, तभी आप मंजिल तक पहुंच सकते हैं।
कुछ लोग अपने जीवन को बहुत ही सहज भाव से लेते हैं। वे नई जमीन पर पांव ही नहीं रखना चाहते, ऊंची उड़ान नहीं भरना चाहते। अपने ऊपर विश्वास न होने की वजह से वे अपने लिए सही कॅरियर का चुनाव ही नहीं कर पाते या जीवन को मनचाहे तरीके से नहीं जी पाते। बेहतर जीवन का विचार भी उनके मन में नहीं आता। इन सपनों को साकार करने का सबसे पहला कदम यही है कि आप जानें, आपको जीवन से क्या चाहिए?
याद रखें कि आपने आखिरी बार अपनी इच्छाओं व सपनों पर कब गौर किया था? क्या आपने महसूस किया था कि आप उन्हें आसानी से पा सकते हैं? क्या इससे आत्मविश्वास को बल मिला था? क्या इससे आपको एहसास हुआ कि अब तक आप इच्छाविहीन की रहे थे? क्या आप याद कर सकते हैं कि आपको आखिरी बार किस चीज से खुशी मिली थी? क्या आप अपनी प्रसन्नता को पहचाने बिना, बस यूं ही दिन-प्रतिदिन जिए जा रहे हैं?
हमारा पूरा जीवन ऐसे सभी कारणों के साथ बंधा है, जो हमारे वश में हैं और कुछ ऐसे, जिन पर हमारा वश नहीं है। जीवन में लगातार बदलाव की वजह से हमारे सपने, उम्मीदें व जरूरतें भी बदलती रहती हैं। इसलिए हमें भी इन हालात के साथ बदलना चाहिए।
एक बच्चे और व्यस्क के सपने एक से नहीं होते। उनमें आयु के साथ-साथ बदलाव आता जाता है। एक छात्र, अपने लिए अच्छी नौकरी चाहता है। मैं सोचता था कि जीवन में लेक्चरर बनना ही सबसे बड़ी सफलता होती है। जब मैंने आई.पी.एस. में दाखिला लिया तो मुझे लगा कि मैं आई.पी.एस. या आई.ए.एस. में ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकता था।
मेरे आई.पी.एस. में कोई बुराई नहीं थी, लेकिन दूसरों को दूसरी सर्विस में जाता देख मुझे लगा कि वहां जाना ज्यादा बेहतर होता, लेकिन मैंने यहीं रहकर पूरी मेहनत की और रिटायरमेंट के समय में उच्च पद (भारत सरकार के सेक्रेट्री पद के बराबर) था। मैंने आई.पी.एस. के दौरान हर अवसर का पूरा लाभ उठाया और जीवन के हर दिन को खुशियों से भर दिया।
मैंने हमेशा यही कल्पना की कि मेरे साथ अवश्य ही कुछ अच्छा और बड़ा घटेगा। मैंने अपने इन सपनों को हकीकत में बदल दिया, क्योंकि मुझे अपनी योग्यता पर कोई संदेह नहीं था।
आने वाले बेहतर कल की कल्पना के लिए साहस बटोरना पड़ता है। इस कल्पना को प्रतिदिन दोहराना पड़ता है, ताकि आपको विश्वास हो जाए कि आप सही दिशा में जा रहे हैं। एक बार इन सपनों पर केंद्रित होने के बाद आप इन्हें पूरा करने में जुट जाएंगे। सदा विश्वास रखें कि आप अपने सपने पूरे कर सकते हैं और आपको खुश रहने का पूरा हक है। अटल विश्वास ही सपनों को हकीकत में बदल सकता है।
एक सही फैसला पूरा जीवन बदल देता है। अक्सर सारी परेशानियों का हल हमारे पास ही होता है बस भीतर की उस आवाज पर ध्यान देना होता है।
सफलता व जीवन में बदलाव के लिए नई चुनौतियों, विचारों व अवसरों का स्वागत करें। यदि कोई विचार काम नहीं कर रहा तो उसे बदलने में क्या हर्ज है? संदेह व भय में छिपने की बजाय उनसे ऊपर उठने के लिए कुछ क्यों न किया जाए। अगर कुछ करना चाहते हैं तो आपको अपने आरामदायक घेरे से बाहर आना ही होगा।
(लेखक सीबीआई के पूर्व निदेशक हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता का जादू' से साभार)
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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