तरीका बदलकर काम को बनाइए दिलचस्प

डा. रमेश पोखरियाल 'निशंक'

नई दिल्ली, 30 जनवरी (आईएएनएस)। संसार की सबसे बड़ी स्टील कम्पनियों आर्सेलर स्टील और मित्तल स्टील के मालिक सादलपुर (राजस्थान) में जन्मे प्रख्यात उद्योगपति लक्ष्मी मित्तल को पारंपरिक इस्पात कारोबार में आनंद नहीं आया। उन्होंने कामकाज के ढर्रे में बदलाव लाकर बीमार उद्योगों का अधिग्रहण करके उनका कायाकल्प करने में जी-जान से मेहनत की।

वह कहते हैं, "घाटे में चलने वाले उद्योगों को फिर से लाभ में लाने की चुनौती में मुझे संतुष्टि तथा सुख मिलता था और जिसके साथ ही सफलता मिलती गई।"

यह कहने से अधिक उपयुक्त कुछ नहीं है कि यदि आप अपने काम से प्रेम करते हैं तो समझिए कि आप स्थायी अवकाश पर हैं। काम से संतोष मिलना और उसे करने में पूरा आनंद अनुभव करना सफलता की कुंजी है। धनी लोग बहुत मेहनत करते हैं। इतनी मेहनत वे इसलिए नहीं करते हैं कि उन्हें धन की आवश्यकता है, बल्कि इसलिए करते हैं कि वे उसे करने के लिए स्वत: प्रेरित होते हैं। काम से प्रेम करने के कारण ही वे काम करते हैं। यह गुण कलाकारों, संगीतज्ञों, खिलाड़ियों, गणितज्ञों, रॉकेट वैज्ञानिकों, अभिनेताओं और यहां तक कि राजनेताओं में भी देखा जाता है।

लोग अपना पेशा पसंद न आने पर काम बदल लेते हैं। वास्तुकार, अभिनेता बन जाते हैं। वकील, राजनेता बन जाते हैं और अभिनेता मॉडल बन जाते हैं। एक बेहद महत्वपूर्ण पहलू अपनी क्षमता को पहचानना है। यह जानना है कि आप किसी काम में कितने अच्छे हैं। एक बार यह तय कर लेने के बाद आप काम के लिए तैयार होते हैं।

किसी क्षेत्र में सुदृढ़ औपचारिक शिक्षा से आत्मविश्वास आता है और यह शिक्षा आपके ज्ञान को बढ़ाती है। आप इसे टाल नहीं सकते। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि यह आपको एक सुरक्षा-कवच देती है और प्रयत्न सफल न होने की स्थिति में पीछे हटने का एक विकल्प भी।

ऐसा कई बार होता है कि हम उन सीढ़ियों से ऊपर चढ़ते हैं जो किसी और ने हमारे सामने रख दी हैं। वे लोग जो अपने लक्ष्य को प्राप्त करते हैं, वे कुछ अलग होते हैं। वे उनमें से होते हैं जो जब चाहें अपना रास्ता बदलने को तैयार रहते हैं। यह आपकी जिंदगी में कभी भी हो सकता है। यहां तक कि सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद भी लोगों ने अपनी दृढ़ धारणा के आधार पर नया काम शुरू किया और इसे बेहतरीन तरीके से किया। नए काम से उन्होंने नाम, धन और प्रसिद्धि पाई। अत: हर काम अच्छा है। आप जिस काम में अच्छे हैं, उस पर अडिग रहिए। शेष सभी बातें खुद-ब-खुद ठीक हो जाएंगी।

दरअसल, लोग जीवनयापन करने के लिए काम करते हैं, धन के लिए काम करना गुनाह भी नहीं। या तो आप वह काम कीजिए जो आपको पसंद है या फिर जो काम कर रहे हैं उसे पसंद करना शुरू कर दीजिए।

संगीतकार ए.आर. रहमान को लोग उनके मिले ऑस्कर पुरस्कार के कारण तो जानते ही हैं, साथ ही उनके द्वारा बनाई गई कर्णप्रिय धुनों के कारण भी।

रहमान कहते हैं, "मुझे अपने काम में आनंद आता है। आराम में मन ही नहीं लगता।" उनके अनुसार "यदि आपका मन काम में लगता है तो निश्चित जानिए कि आपकी सफलता भी शुरू हो गई।"

महात्मा गांधी कहा करते थे कि आप अपने जीवन में कहां तक जाना चाहते हैं, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप किस सीमा तक सीख सकते हैं और अपने कार्य में कितना आनंद ले सकते हैं।

रोजमर्रा के काम को ज्यादा दिलचस्प बनाने के लिए व्यक्ति को काम का तरीका बदल देना चाहिए। पिकनिक इसका सबसे अच्छा उदाहरण है। किसी रविवार को सुबह अपने दोपहर का भोजन तैयार कीजिए। इसे एक टोकरी में रखिए। एक गद्दा और अपने मनपसंद का सामान लीजिए। फिर पहाड़ी के ऊपर किसी पेड़ को खोजते हुए शहर के बाहर चालीस किलोमीटर तक निकल जाइए। पेड़ के नीचे बैठिए और खाने की टोकरी खोलकर वहीं खाना खाइए। ऐसा करने के बाद आपकी पिकनिक स्फूर्तिदायक रही तो इसलिए, क्योंकि आपने कुछ परिवर्तन किया, यह परिवर्तन है संदर्भ का परिवर्तन।

इसी तरह आप नवीन सोच और प्रयोग के जरिए अपने काम में ताजापन ला सकते हैं। याद रखिए, यदि आप अपने काम से प्रेम करते हैं तो धन हमेशा आपको सह-उत्पाद के तौर पर अपनाएगा। स्कूल के दिनों में आप पढ़ाई में कैसे थे, यह मायने नहीं रखता। यह मायने रखता है कि बेहतर काम कर जीवन में आप किस मुकाम पर पहुंचते हैं।

(लेखक उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री हैं। डायमंड पॉकेट बुक्स प्रा. लि., नई दिल्ली से प्रकाशित उनकी पुस्तक 'सफलता के अचूक मंत्र' से साभार)

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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