2जी घोटाले से ली सीख, सख्त हुए दूरसंचार नियम

सिब्बल ने कहा कि समय पर सेवाएं शुरू करने में असफल रही कुछ और कम्पनियों को कारण बताओ नोटिस जारी किए जाएंगे। सिब्बल ने कहा, "हम उस स्तर पर पहुंच गए हैं जहां मौजूदा नीति के उद्देश्य पूर्ण हो चुके हैं। प्रत्येक सर्किल में 12-14 प्रतिस्पर्धी हैं। दूरसंचार घनत्व करीब 62 प्रतिशत हो गया है। अब नीतियों में दिशात्मक बदलाव की जरूरत है।"
भविष्य में 'पहले आओ पहले पाओ' की नीति के आधार पर स्पेक्ट्रम जारी करने की संभावना से इंकार करते हुए उन्होंने कहा, "यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि सभी प्रतिस्पर्धियों को समान अवसर मिलें। इसके अलावा मूल्यों को लेकर कोई भी नीति सभी प्रतिस्पर्धियों पर समान रूप से लागू करने की जरूरत है।"
उन्होंने नई नीति के मुख्य बिंदु निम्नानुसार रेखांकित किए-
-लाइसेंस जारी करने की प्रक्रिया को स्पेक्ट्रम आवंटित करने की प्रक्रिया से अलग किया जाएगा।
- अब से स्पेक्ट्रम केवल बाजार आधारित व्यवस्था के जरिए आवंटित किए जाएंगे।
- सभी सेवा प्रदाताओं को पर्याप्त स्पेक्ट्रम उपलब्ध कराए जाएंगे।
सिब्बल के मुताबिक सभी मुद्दों पर भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई) से प्रतिक्रियाएं मांगी गई हैं। सिब्बल ने नवम्बर में मंत्रालय का पदभार ग्रहण करने के समय 100 दिन में नई नीति घोषित करने की बात कही थी। सर्वोच्च न्यायालय ने पिछले दिनों 11 कम्पनियों को नोटिस जारी करके पूछा गया कि समय पर सेवाएं शुरू करने में असफलता सहित विभिन्न शर्ते पूरी नहीं करने के मामले में क्यों न उनका लाइसेंस रद्द किया जाए।
एतिस्लात, एस-टेल, लूप टेलीकॉम, वीडियोकॉन, एलियांज इंफ्रा, आइडिया सेल्यूलर, टाटा टेलीसर्विसेज, सिस्टेमा श्याम, डिशनेट वायरलैस और वोडाफोन एस्सार को नोटिस जारी किए गए हैं।












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