अगवा पुलिसकर्मियों के परिजनों ने की रिहाई की अपील (लीड-1)
पांच पुलिसकर्मियों के अलावा एक नागरिक को भी अगवा किया गया है। इन सभी का शुक्रवार तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है। अगवा किए गए सभी छह व्यक्तियों की तलाशी के लिए गहन अभियान चलाया जा रहा है। वहीं नक्सली इस घटना पर चुप्पी साधे हुए हैं। नक्सलियों की ओर से रिहाई के बदले किसी तरह की मांग अभी तक नहीं की गई है।
नारायणपुर के पुलिस अधीक्षक मयंक श्रीवास्तव ने आईएएनएस को फोन पर बताया, "नक्सलियों द्वारा हमारे जवानों को जिन-जिन स्थानों पर बंधक बना कर रखे जाने की संभावना थी, वहां-वहां पुलिस दस्ते ने छापेमारी की, लेकिन हाथ कुछ भी नहीं लगा। नक्सलियों ने अभी तक कोई मांग भी पेश नहीं की है.. हमें आशा है कि अपहृत लोग सुरक्षित हैं।"
ज्ञात हो कि हथियारबंद नक्सलियों ने मंगलवार को नारायणपुर में एक यात्री बस पर धावा बोला था और छत्तीसगढ़ सशस्त्र बल के पांच जवानों के अलावा एक नागरिक को अगवा कर लिया था।
ये पुलिस कर्मी निहत्थे थे और वर्दी में नहीं थे। वे सभी छुट्टी मंजूर होने के बाद एक दूरवर्ती इलाके में अपने तैनाती स्थल से नारायणपुर स्थित जिला मुख्यालय जा रहे थे।
पुलिस मुख्यालय के अधिकारियों का कहना है कि नक्सलियों ने अपहृत लोगों को सम्भवत: नारायणपुर जिले के अबूझमाड़ स्थित अपने ठिकानों में रखा हुआ है। पुलिस उस इलाके में प्रवेश करने के बारे में सोच भी नहीं सकती, क्योंकि नक्सलियों ने इस इलाके में कई स्तर पर बारूदी सुरंगें बिछा रखी हैं।
उल्लेखनीय है कि बूझमाड़ देश का सबसे घना जंगली इलाका है। कुछ पुलिसकर्मियों का कहना है कि यहां सूरज की किरणें भी जमीन पर शायद ही उतर पाती हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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