बातचीत की मेज पर आएं कश्मीरी अलगाववादी : आजाद

कश्मीर मुद्दे पर वार्ता के लिए कश्मीरी अलगाववादियों के सकारात्मक जवाब की जरूरत पर जोर देते हुए आजाद ने जम्मू प्रेस क्लब में संवाददाताओं से कहा, "अगर केंद्र मीलों चलकर आपके पास पहुंच रहा है, तब आपकी जवाबदेही बनती है कि मुद्दे के हल के लिए उतनी दूरी तक आप भी चलें।"

गौरतलब है कि कट्टरपंथी नेता सैयद अली गिलानी और नरमपंथी नेता मीरवाइज उमर फारूख के नेतृत्व वाले हुर्रियत कान्फ्रेंस के दोनों धड़ों ने अपनी कुछ शर्ते मानी जाने तक केंद्र सरकार से वार्ता के लिए 'न' कर दिया है।

दोनों धड़ों ने कहा कि वार्ता शुरू करने से पहले कश्मीर घाटी में तैनात जवानों की संख्या घटाई जाए, सशस्त्र बल विशेषाधिकार कानून को वापस लिया जाए, प्रदर्शनों के दौरान गिरफ्तार बंदियों को रिहा किया जाए तथा कश्मीर को 'विवादित' माना जाए।

आजाद ने कहा, "वे अपनी शर्तो पर अड़े हुए हैं, जोकि दुर्भाग्यपूर्ण है। इसकी बजाय उन्हें वार्ता के लिए जमीन तैयार करनी चाहिए और केंद्र के साथ बिना शर्त वार्ता करनी चाहिए।"

उल्लेखनीय है कि आजाद के मुख्यमंत्रित्व काल (नवम्बर, 2005 से जुलाई, 2008) में कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए तीन बार गोल मेज बैठकें हुई थीं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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