हरिद्वार पहुंचा भागीरथी का पानी
ज्ञात हो कि 2400 मेगावाट क्षमता वाली टिहरी परियोजना का हिस्सा 400 मेगावाट क्षमता वाले कोटेश्वर बांध की सुरंग भारी भूस्खलन के कारण 17 दिसंबर 2010 को धंस गई थी। इस कारण भागीरथी के पानी को कोटेश्वर से 22 किलोमीटर ऊपर टिहरी बांध में रोक दिया गया था। टिहरी बांध में बिजली उत्पादन भी तभी से ठप्प था।
कोटेश्वर परियोजना के उप महाप्रबंधक ए.के. श्रीवास्तव ने बताया कि सोमवार से टिहरी बांध में बिजली उत्पादन शुरू हो गया है, साथ ही पानी भी छोड़ा जा रहा है। शुक्रवार को जब बांध की चारों टर्बाइन चलाई गईं तो कोटेश्वर बांध में लगभग 60 मीटर गहरी व 20 किलोमीटर लम्बी झील बन गई और पानी समुद्र तल से 594 मीटर की उंचाई पर बनाए गए स्पिलवे तक पहुंच गया।
श्रीवास्तव ने बताया कि शनिवार दोपहर तक भागीरथी का पानी हरिद्वार पहुंच गया।
ज्ञात हो कि भागीरथी के एक माह से अधिक समय तक कैद रहने के कारण श्रद्धालुओं को इस वर्ष मकर संक्रांति, माघ स्नान और अन्य पवरें पर हरिद्वार, प्रयाग राज इलाहाबाद और गंगा सागर में भागीरथी विहीन जल में ही डुबकी लगानी पड़ी थी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












Click it and Unblock the Notifications