'मिस्र में अशांति के पीछे अमेरिका का हाथ'
समाचार पत्र 'डेली टेलीग्राफ' में शनिवार को प्रकाशित एक रपट में कहा गया है कि काहिरा स्थित अमेरिकी दूतावास ने युवा असंतुष्ट की पहचान, मिस्र की सुरक्षा एजेंसियों से गुप्त रखा था। वह असंतुष्ट न्यूयार्क जाकर अक्टूबर 2008 में काहिरा वापस लौट आया था। उसने अमेरिकी अधिकारियों को बताया था कि विपक्षी समूह राष्ट्रपति हुस्नी मुबारक की सत्ता को उखाड़ फेकने और 2011 में एक लोकतांत्रिक सरकार स्थापित करने की योजना बना रहे हैं।
उस असंतुष्ट को विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में मिस्र के सुरक्षाकर्मियों ने गिरफ्तार कर लिया, लेकिन मीडिया रिपोर्ट में उसकी पहचान गुप्त रखी गई।
मिस्र के प्रदर्शनकारियों को ट्यूनीशिया में हुए विद्रोह को दोहराने की उम्मीद है, जिसके कारण वहां के राष्ट्रपति जाइन अल-अबीदीन बेन अली को लगभग 23 सालों तक सत्ता में रहने के बाद 14 जनवरी को कुर्सी छोड़नी पड़ी थी।
यह चकित करने वाला खुलासा पूर्व में विकिलीक्स द्वारा जारी गोपनीय अमेरिकी राजनयिक संदेशों में शामिल रहा है। इन संदेशों से यह बात उजागर हुई है कि अमेरिकी अधिकारियों ने पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए उस असंतुष्ट को रिहा करने के लिए मिस्र सरकार पर दबाव बनाया था।
विकिलीक्स खुलासे के अनुसार काहिरा में तत्कालीन अमेरिकी राजदूत मार्गरेट स्कोबी ने 30 दिसम्बर, 2008 को एक गोपनीय संदेश भेजा था, जिसमें लिखा था कि विपक्षी संगठनों ने सत्ता परिवर्तन की कथित रूप से गुप्त योजना तैयार की है।
राजदूत स्कोबी ने वाशिंगटन में अमेरिकी विदेश मंत्री को जो गोपनीय संदेश भेजा था, उसका शीर्षक था "छह अप्रैल वाला कार्यकर्ता अपने अमेरिका दौरे पर और मिस्र में सत्ता परिवर्तन।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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