केंद्रीय मंत्रिमंडल में काले धन को वापस लाने पर चर्चा
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने गुरुवार को मंत्रिमंडल सहयोगियों के साथ विदेशों में जमा काले धन को वापस देश में लाए जाने के बारे में चर्चा की।बुधवार को सर्वोच्च न्यायालय ने अपनी एक टिप्पणी में पूछा था कि सरकार क्यों 15 खरब डॉलर की 'राष्ट्रीय लूट' में शामिल लोगों के नाम सार्वजनिक नहीं कर रही है।
बैठक के बाद रक्षा मंत्री ए. के. एंटनी ने संवाददाताओं से कहा कि सरकार विदेशों में जमा धन को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है, लेकिन उसकी एक प्रक्रिया है।वित्त मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि सरकार काले धन को वापस लाने के लिए विभिन्न देशों के साथ कर समझौतों पर फिर से बात कर रही है।
केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड के प्रवक्ता ने कहा कि प्रत्येक देश से आंकड़े जुटाना एक बड़ा मुद्दा है। इसके लिए अलग-अलग देशों में अलग-अलग व्यवस्था है। उन्हें एक मानक प्लेटफार्म पर लाना होगा।विपक्ष लगातार इस मुद्दे पर सरकार को घेर रही है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने विदेशों में जमा काले धन के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा दिए गए बयानों को गैरजिम्मेदाराना करार देते हुए इसकी आलोचना की है।
पार्टी की युवा इकाई भारतीय जनता युवा मोर्चा (भाजयुमो) द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में गुरुवार को आडवाणी ने कहा, "सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार को कहा कि अवैध तरीकों से जोड़ा और विदेशों में जमा किया गया काला धन राष्ट्रीय लूट का सूचक है और मंत्रिमंडल में फेरबदल के बाद गुरुवार हुई कैबिनेट की बैठक में सरकार इस पर चर्चा को बाध्य हुई है।"
उन्होंने कहा कि भाजपा ने 2009 के लोकसभा चुनाव में जब इस मुद्दे को उठाया था तो कांग्रेस ने इसे चुनावी स्टंट करार दिया था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने इस सम्बंध में जो बयान दिए हैं वे गैरजिम्मेदाराना हैं।
वामपंथी पार्टियां काले धन को वापस लाने के लिए करों में छूट देने का विरोध कर रही हैं। मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने संवाददाताओं से कहा कि अधिकांश काले धन अवैध तौर पर विदेशों में जमा किए गए हैं इसलिए कर में छूट का सवाल ही नहीं पैदा होता है।
प्रधानमंत्री ने बुधवार को स्पष्ट किया था कि विदेशों में काला धन जमा करने वालों के नाम सर्वाजनिक नहीं किए जा सकते, क्योंकि इससे भारत के दूसरे देशों के साथ हुए समझौतों का उल्लंघन होगा।मंत्रिमंडल विस्तार के दौरान पत्रकारों के सवाल पर प्रधानंत्री ने कहा था, "सूचना को सार्वजनिक नहीं किया जा सकता। यह समझौतों का उल्लंघन होगा।"
उन्होंने कहा था, "काले धन को वापस लाने का कोई त्वरित तरीका नहीं है। हमें कुछ सूचनाएं मिली हैं और वह हमें कर संग्रह के लिए मिली है।"दरअसल विदेशी बैंकों में अवैध धन जमा करने वाले भारतीयों के नाम उजागर करने में केंद्र सरकार की अनिच्छा को देखते हुए सर्वोच्च न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है।
यह मुद्दा सर्वोच्च न्यायालय के सामने तब आया जब वरिष्ठ वकील रामजेठमलानी ने जर्मनी की सरकार की सूचनाओं के साझा करने की इच्छा पर सरकार को कदम उठाने के लिए अदालत द्वारा निर्देश दिए जाने की मांग की। जर्मनी की सरकार ने वहां बैंकों में भारतीयों द्वारा जमा किए गए पैसे के बारे में सूचना साझा करने की इच्छा जताई थी।माना जा रहा है कि विदेशों में 15 खरब डॉलर काला धन जमा है, जो भारत के कुल घरेलू उत्पादन का डेढ़ गुना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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