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उत्तर प्रदेश : आठ साल बाद फिर हुई 'राजा भैया' को जेल

प्रतापगढ़। उत्तर प्रदेश के 72वें जिले के रूप में जाने जाने वाला प्रतापगढ़ शहर अपनी खूबियों से ज्यादा वहां की राजनैतिक लड़ाई के लिए जाना जाता है। लड़ाई भी ऐसी जो प्रतापगढ़ जैसे छोटे शहर को देश के टॉप हेडलाइन में ले आती है। जीं हां आपने सही समझा हम बात कर रहे है कुंडा के विधायक रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया और प्रदेश की सीएम मायावती की। जिनके बीच चूहे-बिल्ली का खेल चल रहा है। काफी अरसे से शांत बैठा ये शहर अचानक से शनिवार को फिर से सुर्खियों में आ गया क्योंकि 'कुंडा के राजा' रघुराज प्रताप सिंह एक बार फिर से सलाखों के पीछे जा पहुंचे।

बसपा शासन में एक बार फिर से राजा भैया जेल भेज दिए गए हैं। पिछले शासन में मायावती सरकार को अस्थिर करने की मुहिम छेड़ने पर राजा भैया के साथ ही एमएलसी गोपालजी, विधायक रामनाथ सरोज समेत कई समर्थकों को जेल जाना पड़ा था। यहीं नहीं मायावती ने तत्कालीन शासन में बदले की राजनीति का खेल खेला था और राजा और उसके साम्रज्य को नेस्तेनाबूत करने में कोई कसर नहीं छोड़ी थी। राजा की जमीन और महल को को पक्षी विहार में तब्दील कर दिया गया था और उनकी संपत्ति की कुर्की करा दी गई थी। यही नहीं माया ने खुले राजनैतिक मंच से राजा को ' कुंडा का गुंडा' संबोधित किया था।

लेकिन इस बार जब मायावती सत्तासीन हुई तो उनके शासन में काफी बदलाव देखे गये। खुद राजा भी उनकी सूचि से आउट ऑफ लिस्ट दिख रहे थे लेकिन अचानक चार साल बाद इतिहास ने करवट ली और राजा माया के निशाने पर आ खड़े हुए। आपको बता दें पिछली बार राजा भैया 2 नवंबर 2002 को आधी रात के बाद विधायक पूरन सिंह बुंदेला को धमकी देने के मामले में गिरफ्तार किए गए थे।

फिर 25 जनवरी 2003 को उन्हें उनके पिता राजा उदय प्रताप सिंह के साथ पोटा के तहत जेल भेजा गया था। हालांकि बाद में जबलपुर कोर्ट से राजा भैया पोटा से बरी हो गए थे। इस दौरान राजा भैया लगभग 18 महीने तक जेल में रहे थे, सपा शासन में ही वह रिहा हुए थे। यही वो समय था जब राजा की पत्नी को भी उनसे जेल में मिलने की अनुमति नहीं दी गई थी, जबकि वो उस समय गर्भवती थी। लखनऊ जेल में जब उनकी पत्नी ने उनसे मिलने की जिद की थी तो उनके साथ काफी बदसलूकी भी की गई थी ।

जबकि पिछले साल यानी 2009 में राजा भईया का नाम एक एयरक्राफ्ट हादसे में आया था और उनके खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। उनके ऊपर एयरक्राफ्ट के चालक राजकुमार को बंधक बनाकर हत्या करने का आरोप लगा था। हालांकि बाद में पुलिस ने उन्हें क्लीन चिट दे दी थी। एमएलसी चुनाव के दौरान भी राजा भैया की गिरफ्तारी होने की काफी चर्चा थी। लेकिन 18 दिसंबर 2010 को राजा एक बार फिर से पुलिस के शिंकंजे में आ गये हैं।

उन के ऊपर बाबागंज ब्लाक प्रमुख पद के बसपा प्रत्याशी मनोज शुक्ला पर जान लेवा हमला करवाने का आरोप है। अब देखना दिलचस्प होगा कि राजा का इस बार सरपरस्त कौन बनता है? उनकी रहनुमा बनीं सपा के सितारे खुद गर्दिश में हैं। अब तो ये आने वाला वक्त तय करेगा कि इस बार राजा की जेल पारी कितनी लंबी होने वाली है। और अगर राजा जेल से बाहर आता है तो उसका अगला कदम क्या होता है?

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