ऑस्ट्रेलिया: नाव डूबने से 27 लोगों की मौत

ऑस्ट्रेलिया में अधिकारियों ने बताया है कि चट्टानों से टकराने के बाद एक नाव डूबने से कम से कम 27 शरणार्थियों की मौत हो गई है. आशंका है कि इन लोगों की अवैध तरीके से तस्करी की जा रही थी. नाव में बैठे 42 लोग बच गए हैं.
घटनास्थल से आ रही तस्वीरों से ऐसा लगता है कि नाव के टुकड़े-टुकड़े हो गए. ये नाव क्रिस्मस आइलैंड जा रही थी जो ऑस्ट्रेलियाई नियंत्रण वाला वो इलाक़ा है जहाँ पनाह माँगने वालों को रखा जाता है.
द्वीप के लोगों का कहना है कि नाव में बैठे लोग मदद के लिए चिल्लाते रहे लेकिन वे ज़्यादा कुछ नहीं कर पाए. एक ऑस्ट्रेलियाई अख़बार की वेबसाइट से बातचीत में स्थानीय नागरिक ने बताया, "हमने चट्टानों पर रस्सियाँ और लाइफ़ जैकेट फ़ेंके. कुछ लोग ये जैकेट पहन पाए लेकिन पानी में कई लोगों की लाशें तैर रही थीं. इनमें छोटे बच्चे भी शामिल हैं."
शरणार्थियों की बढ़ती संख्या
माना जा रहा है कि ज़्यादातर लोग ईरान और इराक़ के थे.कस्टम अधिकारियों ने बताया है कि मुश्किलों के बावजूद बचाव कार्य जारी है. ऑस्ट्रेलिया में इस साल नाव के रास्ते आने वाले शरणार्थियों की संख्या बढ़ी है. क्रिस्मस आइलैंड में करीब तीन हज़ार लोग हैं जो अपने मामले में फ़ैसला सुनाए जाने का इंतज़ार कर रहे हैं.
शरणार्थियों के मामले में विकसित देशों में से ऑस्ट्रेलिया सरकार की नीतियाँ सबसे कठोर हैं इन प्रावधानों के तहत शरण माँगने वाले ऑस्ट्रेलिया तक पहुँचे भी तो उनकी नावें बीच में ही रोक दी जाती हैं और उन्हें नारू और पापुआ न्यू गिनी जैसे द्वीपों में भेज दिया जाता है और वहीं उनके दावों के बारे में विचार किया जाता है.
जो लोग ऑस्ट्रेलिया पहुँच भी जाते हैं उन्हें शरणार्थी केंद्रों पर रखा जाता है और फिर उसके बाद शरण से जुड़े उनके प्रार्थना पत्रों पर विचार किया जाता है. अधिकतर लोगों को महीनों वहाँ गुज़ारने पड़ते हैं जबकि कुछ को हिरासत में वर्षों तक रहना पड़ जाता है.












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