अपने बयान को लेकर चारों खाने चित्त दिग्विजय सिंह

दिग्विजय सिंह ने अपने बयान में कहा था कि शहीद पुलिस अधिकारी हेमंत करकरे ने दिग्विजय को मुंबई हमले से तकरीबन दो घंटे पहले फोन करके हिंदु गुटों से अपनी जान को खतरा होने की बात कही थी।
उस समय करकरे मालेगांव विस्फोट की जांच कर रहे थे। शायद दिग्विजय ने ये बयान मुंबई हमलों में हिन्दुवादी संगठनों को लपेटने के लिए दिया हो। मगर अब दिग्विजय का ये बयान उनपर बहुत भारी पड़ रहा है और अब दिग्विजय अपनी बात की सफाई देते फिर रहे हैं।
दिवंगत करकरे की पत्नी ने दिग्विजय के बयान की आलोचना की
दिग्वियज के इस बयान की शहीद करकरे की पत्नी ने कड़ी निंदा की है वहीं उनकी पार्टी कांग्रेस ने इसे दिग्विजय का निजी बयान बताकर दरकिनार कर दिया है। मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती को जहां उन पर दया आ रही है, वहीं मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उन्हें मानसिक इलाज कराने की सलाह दी है।
उमा भारती ने कहा, "मैंने जब दिग्विजय सिंह का बयान पढ़ा तो विश्वास ही नहीं हुआ कि वह इस स्तर तक जा सकते हैं। मुझे तो दिग्विजय की हालत पर दया आ रही है। उनकी अपनी पार्टी में तो छीछालेदर हो ही रही है, करकरे की पत्नी ने भी उनकी आलोचना की है।"
वहीं शिवराज सिंह ने कहा, "मैं तो दिग्विजय के बयानों को टिप्पणी करने के लायक ही नहीं समझता। शहीद पर उन्होंने जो टिप्पणी की है, वह निंदनीय है। शायद दिग्विजय का मानसिक संतुलन बिगड़ गया है और उन्हें इलाज की जरूरत है।"
भोपाल दौरे पर आए कानून मंत्री वीरप्पा मोइली से जब दिग्विजय सिंह की टिप्पणी पर सवाल किया गया तो उन्होंने कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।












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