मलेशिया: छड़ी से मारने की क्रूर सज़ा

एमनेस्टी का अनुमान है कि हर साल 10,000 से ज़्यादा कैदियों और 6000 शरणार्थियों को छड़ी मारने की सज़ा दी जाती है.मलेशिया सरकार की दलील है कि छड़ी की मार आपराधिक गतिविधियों को रोकने में ज़रूरी भूमिका निभाती है.रिपोर्ट के मुताबिक, ''मलेशिया के लगभग सभी इलाकों में सुरक्षा अधिकारी और सरकार के नुमाइंदे छड़ी का इस्तेमाल कर कैदियों की खाल उधेड़ देते हैं. इस मार से उनके शरीर पर घाव हो जाते हैं और उनकी खाल छिल जाती है. इसके निशान हमेशा उनके शरीर पर रहते हैं.''
रिपोर्ट में एक शरणार्थी के हवाले से कहा गया है, '' एक कमरे में कैदियों को छड़ी से मारने के लिए एक कुर्सी रखी हुई थी. हमें उस खास कुर्सी पर मुंह नीचे कर बैठने के लिए कहा जाता था. हमारे हाथ और पैर बंधे होते थे. फिर मुझे छड़ी से मारा गया और एक कमरे में छोड़ दिया गया. मेरे ज़ख्मों पर मरहम लगाया गया, लेकिन कई दिनों कर उनसे खून निकलता रहा.''
मलेशिया की जेलों में हर महीने छड़ी से मारने की 1200 से ज़्यादा घटनाएं होती हैं. नशीली दवाओं की तस्करी, हिंसक अपराधों और यौन दुर्व्यवहार के लिए आमतौर पर इस तरह की सज़ा दी जाती है.रिपोर्ट के मुताबिक मलेशिया में बड़ी संख्या में लोग शरणार्थी के तौर पर प्रवेश कर लेते हैं. इन लोगों को सीमा पार खदेड़ने से पहले छड़ी से मार खाने की सज़ा दी जाती है.












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