अब 'बिहारी' होना गाली नही लगता
खुलेआम गुंडागर्दी, हत्या, लूट, बलात्कार, अशिक्षा, गरीबी ये तस्वीर थी बिहार की। लोगों को बिहारी कहना भी एक गाली की तरह लगता था। लेकिन आज बिहार बदल गया है। आज से 15 साल पहले का बिहार और आज के बिहार में बहुत अंतर है । ये तो कहना अतिश्योक्ति होगी कि बिहार बदल चुका है लेकिन इतना जरूर है कि बिहार बदल रहा है। वहां की जनता बदल गई है, वो पहले से ज्यादा समझदार और निडर हो गई है। वो जान गई है कि कौन सही है और कौन गलत। बिहार के चुनावी नतीजे ये कह रहे है कि बदल रहा है बिहार। चुनावों में बिहारी जनता की हिस्सेदारी आपको उसके जागरूक होने का बखूबी एहसास कराती है।
ना तो वहां राहुल गांधी का युवा चार्म काम आया और ना ही लालू की हंसी ठिठौली ने समां बांधा। वहां काम आयी उसकी मेहनत जिसने उनके लिए सड़के बनवाई, पुल बनवाये और बाढ़ पीड़ितों के लिए अनाज और मकान की व्यवस्था की। मतलब साफ है जो काम करेगा वो ही मेवा खायेगा। हम यहां पर नीतीश कुमार का गुणगान नहीं कर रहे हैं, हम सिर्फ ये बता रहे हैं कि अगर राजनीति की बिसात अब जातिवाद, धर्म और आरोप-प्रत्यारोप के गोटियों से नहीं सजती बल्कि जनता के लिए किये गये कामों से सजती है।
आज बिहार में लड़किया पढ़ रही है, बैखौफ होकर गांव से शहर जा रही है। साक्षरता का रेट बढ़ा है। और सबसे बड़ी बात आज लोगों को कम से कम बिहारी कहलाना गाली नहीं लगता है। आज वो अपनी पहचान नहीं छुपाते है, इसके पीछे काऱण है कि आज बिहार और बिहारियों की तस्वीर बदल चुकी है उनके अंदर खोया आत्मविश्वास वापस आ चुका है आज वो अपने आप को किसी से कमतर नहीं आंकते बल्कि ये कहते फिरते है 'एक बिहारी सब पर भारी' ।













Click it and Unblock the Notifications