'लिव इन रिलेशन' फैसले में कैसे आया 'रखैल' शब्द
उच्चतम न्यायालय में गुस्से में नजर आ रहीं जयसिंह ने न्यायमूर्ति मार्कण्डेय काटजू और टीएस ठाकुर की सदस्यता वाली पीठ से कहा कि फैसले में इस्तेमाल किया गया शब्द बेहद आपत्तिजनक है और इसे हटाए जाने की जरूरत है। जयसिंह ने कहा कि भारत का सुप्रीम कोर्ट 21वीं सदी में किसी महिला के लिए 'रखैल" शब्द का इस्तेमाल आखिर कैसे कर सकता है? क्या कोई महिला यह कह सकती है कि उसने एक पुरुष को रखा है?
उन्होंने न्यायालय से कहा कि मैं इस टिप्पणी को हटाने के लिए एक आवेदन दायर करना चाहूँगी। मैं इस अदालत के सामने पेश नहीं होना चाहती हूँ, मैं खुद को इससे अलग रखना चाहूँगी। जयसिंह ने इस बात पर काफी आश्चर्य जताया कि देश का उच्चतम न्यायालय किसी महिला के खिलाफ ऐसी टिप्पणी कैसे कर सकता है।
एएसजी का रुख देखकर पीठ की अध्यक्षता कर रहे न्यायमूर्ति काटजू ने उनसे कहा कि वह न्यायालय के सामने खुद को मुकदमे तक ही सीमित रखें।
बहरहाल, न्यायमूर्ति ठाकुर ने दखल देकर जयसिंह से पूछा कि क्या 'कीप" के बदले 'कॉंकबाइन" शब्द का इस्तेमाल ज्यादा उचित रहेगा? इस पर, एएसजी ने कहा कि उनकी आपत्ति मुख्यत: पीठ की ओर से कल सुनाए गए फैसले में 'कीप" अर्थात 'रखैल" शब्द के इस्तेमाल पर है।
गौरतलब है कि इंदिरा जयसिंह घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण कानून का मसौदा तैयार करने में भी शामिल रही हैं।एक अहम फैसले में गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने कहा था कि लिव-इन रिश्तों में रह रही कोई महिला गुजारा भत्ते की हकदार उस वक्त तक नहीं है, जब तक वह कुछ निश्चित मानदंड पूरे नहीं करती।













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