पूर्वोत्तर में भूकंप की निगरानी के लिए नया तंत्र

मौसम विज्ञान विभाग के निदेशक दिलीप साहा ने आईएएनएस को बताया, "पूर्वोत्तर राज्यों के लिए वीसैट आधारित रियल टाइम साइस्मिकमॉनिटरिंग नेटवर्क (आरटीएसएमएन) स्थापित करने के लिए दो सेंट्रल रिसीविंग स्टेशन (सीआरएस) शिलांग और नई दिल्ली में शुरू किए जाने हैं।"

उन्होंने बताया कि आरटीएसएमएन एक उपग्रह आधारित पद्धति होगी। इसके लिए आठ राज्यों में 21 स्टेशन बनाए जाएंगे। प्रत्येक स्टेशन के उपकरणों और जरूरी संरचना का विकसित करने में करीब 25 लाख रुपए खर्च होंगे।

ये आरटीएसएमएन स्टेशन असम के गुवाहाटी, तेजपुर, डिब्रूगढ़, सिल्चर, जोरहाट और लेखापानी, अरूणाचल प्रदेश के यूपिया, तवांग, पाशीघाट और जीरो, मेघालय के तुरा और शिलांग, नागालैंड के मोकोकचुंग और कोहिमा, त्रिपुरा के अगरतला और बेलोनिआ, मिजोरम के आईजोल और सैहा, मणिपुर के इम्फाल और सिक्किम के तदांग में बनाए जाएंगे।

साहा ने बताया कि इन स्टेशनों के चालू हो जाने पर भूकंप से पैदा होने वाले कंपन की सटीक जानकारी मिल सकेगी।

भारतीय भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (जीएसआई) पहले ही इन राज्यों में विनाशकारी भूकंप आने की सूचना दे चुका है। भूवैज्ञानिक भी इन राज्यों को विश्व का छठा सबसे खतरनाक भूकंप की आशंका वाला क्षेत्र मानते हैं।

गौरतलब है कि असम में 15 अगस्त, 1950 को आए 8.5 रिक्टर तीव्रता वाले भूकंप में करीब डेढ़ हजार लोगों की मौत हो गई थी। जबकि इस क्षेत्र में वर्ष 1897 में आए 8.7 रिक्टर तीव्रता वाले सबसे खतरनाक भूकंप ने सोलह सौ लोगों की जान ले ली थी।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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