मुंडा के शपथ ग्रहण से दूर रह सकते हैं शीर्ष नेता (लीड-2)
नई दिल्ली/रांची, 10 सितम्बर (आईएएनएस)। झारखण्ड में शनिवार को मुख्यमंत्री के रूप में अर्जुन मुंडा के शपथ ग्रहण समारोह से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के लगभग सभी शीर्ष नेताओं के दूर रहने की संभावना है। यह जानकारी भाजपा सूत्रों ने दी है।
सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी के अलावा पार्टी अध्यक्ष नितिन गडकरी, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष सुषमा स्वराज और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष अरूण जेटली शपथ ग्रहण समारोह से अनुपस्थित रह सकते हैं।
सूत्रों ने कहा कि वरिष्ठ नेता रांची नहीं जा पाएंगे, क्योंकि उन्हें बहुत कम अवधि के अंदर निमंत्रण प्राप्त हुआ है।
सूत्रों ने कहा कि जहां आडवाणी और सुषमा स्वराज दिल्ली में व्यस्त हैं, वहीं जेटली शनिवार को गुजरात में होंगे। गडकरी को नागपुर में गणेश चतुर्थी से संबंधित एक कार्यक्रम में हिस्सा लेना है।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर कहा, "आडवाणीजी ने भाजपा के एक मुस्लिम नेता के घर दिल्ली में आयोजित ईद-उल-फितर से संबंधित एक कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी है। लिहाजा, रांची में मुंडा के शपथ ग्रहण समारोह में उनकी उपस्थिति की संभावना न के बराबर है।"
भाजपा के राज्य प्रवक्ता संजय सेठ ने हालांकि रांची में कहा कि गडकरी शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित हो सकते हैं।
सेठ ने आईएएनएस को बताया, "राजनाथ सिंह, रविशंकर प्रसाद जैसे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ ही छत्तीसगढ़ और उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री भी शपथ ग्रहण समारोह में उपस्थित होंगे।"
पार्टी सूत्रों के अनुसार आडवाणी, मुख्यमंत्री के रूप में मुंडा के चयन तथा झारखण्ड में सरकार बनाने के लिए झामुमो का समर्थन लेने के बारे में खुद को अंधेरे में रखे जाने को लेकर खिन्न हैं।
पार्टी के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "न केवल आडवाणीजी, बल्कि अन्य कई नेता भी झारखण्ड के घटनाक्रम से नाखुश हैं। इस मुद्दे पर पार्टी में स्पष्ट मतभेद है।"
पार्टी ने हालांकि आधिकारिक रूप से इस बात से इंकार किया है।
पार्टी प्रवक्ता रामनाथ कोविंद ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए मुंडा के नाम की घोषणा करने से पहले गडकरी ने वरिष्ठ नेता आडवाणी से सलाह ली थी।
कोविंद ने आडवाणी और गडकरी के बीच संभावित तनाव की बात को खारिज करते हुए आईएएनएस को बताया, "यह सब मीडिया की करतूत है।"
कोविंद ने कहा कि गडकरी ने आडवाणी और पार्टी के संसदीय बोर्ड के अन्य सदस्यों से झारखण्ड के घटनाक्रम पर और मुंडा की नियुक्ति पर रूस से फोन पर चर्चा की थी।
कोविंद ने कहा कि मुख्यमंत्री पद के लिए मुंडा का नाम ही सामने आया और उनके चयन पर आम सहमति है।
कोविंद ने कहा, "इस बारे में संसदीय बोर्ड की बैठक नहीं हुई, क्योंकि अध्यक्ष देश से बाहर हैं।"
गडकरी, वाटर फ्रीडम रिवोल्यूशन (डब्ल्यूएफआर) के निमंत्रण पर छह सितंबर को रूस रवाना हुए थे। वह शुक्रवार को वापस लौटने वाले हैं।
कोविंद के अनुसार जब भाजपा ने मई में शिबू सोरेन सरकार से समर्थन वापस लिया था, उस समय मुख्यमंत्री पद के लिए जरूर कई नाम उभरे थे।
कोविंद ने कहा, "लेकिन इस बार कुछ राजनीतिक मजबूरी के कारण सभी अर्जुन मुंडा के नाम पर सहमत हैं। हमें विश्वास है कि मुंडा राज्य को अच्छा शासन और स्थायित्व मुहैया कराएंगे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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