हिमाचल में सेब की फसलों को चमगादड़ों से नुकसान
शिमला, 8 सितम्बर (आईएएनएस)। यूं तो सेब की फसलों को कीटों से बचाने में चमगादड़ महत्वपूर्ण भूमिका निभाते है, लेकिन इस बार सेब उत्पादन के गढ़ माने जाने वाले शिमला के ऊपरी क्षेत्रों में चमगादड़ों ने सेब की फसलों को भारी नुकसान पहुंचाया है।
चमगादड़ अधिकांश फलों पर चिपकने के दौरान अपने पंजों के निशान छोड़ देते हैं, जिसके कारण वे खाने योग्य नहीं रह जाते हैं।
शिमला के ऊपरी इलाके के भमनोली गांव के सेब उत्पादक रोशन लाल मानता ने बताया कि चमगादड़ सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। उन्होंने बताया,"चमगादड़ों ने कई इलाकों में सेब की फसलों को 50 फीसदी तक नुकसान पहुंचाया है।"
मानता ने बताया,"हम चमगादड़ों की इस समस्या से 40 साल के लंबे अंतराल के बाद फिर दो-चार हो रहे हैं। "
एक अन्य सेब उत्पादक रणविजय सिंह ने बताया कि चमगादड़ों ने बड़े पैमाने पर सेब की फसलों को नुकसान पहुंचाया है।
उन्होंने बताया,"सेब तैयार होने के बाद हाल के हफ्तों में चमगादड़ों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। मुझे लगता है भारी बारिश की वजह से चमगादड़ इससे पहले भोजन की तलाश में कहीं दूसरे जगह पलायन कर गए थे और बारिश खत्म होने के बाद फिर वापस लौट आए हैं।"
सोलन के ऊपरी क्षेत्रों में प्राणियों पर शोध कर रही उत्तम सैकिया ने आईएएनएस को बताया,"इस क्षेत्र में चमगादड़ की दो तरह की प्रजातियां पाई जाती है। एक फ्लाईंग फॉक्स और दूसरा फुलवौस फूट्र वैट।"
उन्होंने बताया,"फ्लाईंग फॉक्स चमगादड़ की आम प्रजाति है। यह प्रदेश के रोहर शहर के आस-पास के क्षेत्र में सक्रिय है।"
सैकिया के मुताबिक फ्लाईंग फॉक्स ने हालांकि कुछ सेब की फसलों को नुकसान पहुंचाया है, लेकिन पर्यावरण को साफ रखने में यह अहम भूमिका निभाता है। नुकसान के मुकाबले इसके फायदे कहीं अधिक है।
उन्होंने बताया कि चमगादड़ कीटों को नियंत्रण करने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसान फलों की रक्षा के लिए कई अन्य तरकीबें अपना कर उसे बचा सकते हैं।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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