नसबंदी के बाद पैदा हुईं जुड़वां बेटियां
उत्तर प्रदेश में जनसंख्या नियंत्रण और परिवार नियोजन की गरज से स्वास्थ्य विभाग ने 'हम दो-हमारे दो' और 'छोटा परिवार-सुखी परिवार' के नारे प्रचारित किए थे। अतर्रा कस्बे के सुलकथोक मुहाल की दुर्गा ने दो बच्चों के बाद 26 सितम्बर 2007 को यहां के सरकारी अस्पताल में नसबंदी करा ली थी। अस्पताल से उसे नसबंदी कराने का प्रमाण पत्र भी दिया गया था। नसबंदी के दो साल के भीतर उसने पांच सितम्बर 2010 को उसी अस्पताल में दो जुडवां बच्चियों को जन्म दिया।
इस असफल नसबंदी से परेशान दंपति ने जिलाधिकारी व मुख्य चिकित्साधिकारी, बांदा से शिकायत कर नसबंदी करने वाले डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई किए जाने और नवजात बच्चियों के भरण-पोषण व पढ़ाई-लिखाई का बोझ उठाने व विभाग से हर्जाना दिए जाने की मांग की है।
बांदा के मुख्य चिकित्साधिकारी डॉक्टर एम.पी. सिंह का कहना है, "नसबंदी के दौरान मामूली लापरवाही से यह गड़बड़ी हुई है। दोषी के खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी गई है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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