परमाणु दायित्व विधेयक में बदलाव चाहता है अमेरिका

अरुण कुमार

वाशिंगटन, 8 सितम्बर (आईएएनएस)। परमाणु संयंत्रों में संभावित दुर्घटना के लिए परमाणु उपकरणों के आपूर्तिकर्ताओं को भी जवाबदेह बनाने के लिए भारतीय संसद द्वारा पारित विधेयक में अमेरिका बदलाव करवाना चाहता है। अमेरिका ने कहा कि वह चाहेगा कि नई दिल्ली विधेयक में संभव परिवर्तनों पर विचार करे।

इस विवादास्पद विधेयक पर अपनी पहली सार्वजनिक प्रतिक्रिया में अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता फिलिप जे. क्राउले ने मंगलवार को संवाददाताओं से कहा, "भारत सरकार के साथ इस मुद्दे पर हम अपनी चर्चा को जारी रखेंगे।"

इस विधेयक से अमेरिकी कंपनियों की नाखुशी पर टिप्पणी करने के लिए कहे जाने पर क्राउले ने कहा, "हमने देखा है कि भारतीय उद्योग जगत भी संसद से अभी हाल ही में पारित कानून के कुछ विशिष्ट पहलुओं के बारे में चिंतित है। हम चाहते हैं कि भारत सरकार इसमें हो सकने वालों बदलावों पर विचार करे।"

भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते को लागू करने के लिए बने अमेरिकी कानून का एक महत्वपूर्ण हिस्सा जवाबदेही को सीमित करना था। अमेरिकी अधिकारी इस भारतीय विधेयक पर सार्वजनिक टिप्पणी करने से बच रहे हैं लेकिन भारत को उपकरणों की आपूर्ति की इच्छुक कंपनियां अपनी चिंताएं जाहिर कर रहीं हैं।

भारत के साथ व्यापार करने वाली करीब 300 कंपनियों की संस्था अमेरिका-भारत व्यापार परिषद (यूएसआईबीसी) चाहती है कि भारत परमाणु संयंत्र संचालकों पर पूरी जवाबदेही डालने और मुआवजा दावों के निपटारे के लिए एक व्यवस्था बनाए।

विधेयक के पिछले सप्ताह राज्यसभा में से पारित होने के बाद संस्था ने सधी प्रतिक्रिया में कहा कि ये नियम दुनिया में प्रचलित सबसे बेहतर तरीके पर आधारित हैं और अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के कन्वेंशन ऑन सप्लीमेंटरी कम्पेनसेशन (सीएससी) के अनुरूप हैं।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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