महंगाई और निजीकरण के खिलाफ हड़ताल से करोड़ों का नुकसान (राउंडअप)

वामपंथी पार्टियों द्वारा शासित राज्यों में हड़ताल के दौरान हिंसक घटनाएं हुई। पश्चिम बंगाल में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 14 लोग घायल हो गए।

प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह सरकार की आर्थिक नीतियों के खिलाफ हुई हड़ताल के चलते उद्योगों को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है। इस दौरान निजी क्षेत्र की विमान सेवाओं की 129 उड़ानें रद्द की गईं। कांग्रेस और वामदलों से सबंधित नौ श्रमिक संगठन इस हड़ताल में शामिल हुए।

हड़ताल के दौरान पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले के नैनूर गांव में कथित रूप से मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा किए गए एक बम हमले में तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई और एक महिला सहित पांच लोग घायल हो गए।

तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने नंदीग्राम और कोंटई में माकपा के कार्यालयों में तोड़फोड़ की जिसमें माकपा के तीन कार्यकर्ता घायल हो गए। उत्तरी 24 परगना जिले में माकपा के कार्यकर्ताओं के तृणमूल समर्थकों को दुकानें खोलने से रोकने के कारण हुए संघर्ष में दो लोग घायल हो गए।

प्रदेश में कानून का उल्लंघन करने के मामलों में राजनीतिक दलों के करीब 1,200 कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार किया गया है।

कोलकाता में हड़ताल के चलते जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। नेताजी सुभाष चंद्र बोस अंतर्राष्ट्रीय हवाईअड्डे से निजी उड़ान सेवाओं की कुल 129 उड़ानें रद्द कर दी गईं और एयर इंडिया की एक अंतर्राष्ट्रीय उड़ान सहित कुल 22 उड़ानें रद्द की गईं। शहर में यातायात पूरी तरह से बंद रहा। चाय बागान हालांकि इस हड़ताल से प्रभावित नहीं हुए।

प्रदेश में बैंक, अन्य कार्यालय और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे। हड़ताल से बाहर रखने के कारण रेल और मेट्रो रेल सेवाएं सामान्य हैं। यात्रियों को परिवहन का केवल यही एकमात्र साधन उपलब्ध है।

वाम मोर्चा समर्थित राज्यों पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा और केरल में बंद का व्यापक असर रहा। तमिलनाडु जैसे राज्यों में बंद का मिलाजुला और कर्नाटक में मामूली प्रभाव पड़ा।

वित्तीय राजधानी मुंबई और राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में हड़ताल का असर अपेक्षाकृत कम रहा लेकिन आटो रिक्शा चालकों के हड़ताल में शामिल होने से दोनों शहरों में यात्रियों को कुछ परेशानी हुई।

कांग्रेस समर्थित राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस (इंटक) के अध्यक्ष जी. संजीव रेड्डी ने कहा कि आठ मजदूर संघों की एक दिवसीय हड़ताल में पूरे देश के 10 करोड़ से अधिक श्रमिकों ने हिस्सा लिया। उन्होंने दावा किया कि हड़ताल को कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी का समर्थन हासिल है।

रेड्डी ने कहा कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और सरकार के अन्य नेता श्रमिकों की मांगों पर चर्चा करने के इच्छुक हैं। उन्होंने कहा कि हड़ताल केवल केंद्र सरकार नहीं वरन् राज्यों और केंद्र दोनों की नीतियों के विरोध में है।

वाम मोर्चा के शासन वाले त्रिपुरा में जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ। अधिकांश बाजार, दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान, बैंक और वित्तीय संस्थान बंद रहे। सड़क यातायात ठप्प है और त्रिपुरा से देश के अन्य हिस्सों के लिए रेल सेवाएं भी प्रभावित हुई हैं।

केरल के कार्यालयों में उपस्थिति बहुत कम रही और निजी बसें, टैक्सियां तथा आटो रिक्शा का परिचलान नहीं हुआ। जहरीली शराब पीने से सोमवार को 23 लोगों की मौत होने के कारण मलप्पुरम जिले को बंद से मुक्त रखा गया।

बंद के कारण तमिलनाडु कपड़ा उद्योग और चेन्नई से घरेलू उड़ानें प्रभावित हुईं जबकि शिक्षण संस्थान खुले रहे। तिरुपुर और कोयम्बटूर के करीब तीन लाख कपड़ा मजदूरों ने हड़ताल में हिस्सा लिया।

तिरुचिरापल्ली में गोल्डेन रॉक रेलवे इकाई के करीब 4,000 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हुए।

असम में जनजीवन प्रभावित हुआ लेकिन चाय और तेल उत्पादन क्षेत्र इससे अछूता रहा।

हिमाचल प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में बैंक और वाणिज्यिक प्रतिष्ठान बंद रहे।

अधिकांश निजी होटल, बैंक और सरकारी बीमा कंपनियों के साथ ही सार्वजनिक क्षेत्र की भारत संचार निगम लिमिटेड (बीएसएनएल) के कार्यालय भी बंद हैं। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के कर्मचारी बहरहाल हड़ताल में शामिल नहीं हुए।

भारतीय उद्योग संगठनों ने इस हड़ताल की आलोचना करते हुए कहा कि दो साल की आर्थिक मंदी के बाद जब अर्थव्यवस्था पटरी पर लौट रही है तब इस हड़ताल से देश को हजारों करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।

एसोचैम की अध्यक्ष स्वाति पीरामल ने कहा, "प्रमुख श्रम संगठनों द्वारा आयोजित की गई यह हड़ताल पूरी तरह अतार्किक है। इस तरह की हड़तालों से किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती केवल उत्पादकता घटती है और समाजिक और आर्थिक विकास अवरुद्ध होता है।"

सीआईआई की निर्यात समिति के अध्यक्ष संजय बुधिया ने कहा, "बंद के कारण व्यापार की भारी हानि हुई है और लोगों को भारी परेशानी झेलनी पड़ी है। राजनीतिक पार्टियों को लोकतांत्रिक तरीके से बहस और विचार-विमर्श के जरिए मुद्दों का समाधान ढूढना चाहिए।"

पीएचडी चैंबर ने कहा कि यह हड़ताल गलत समय पर आयोजित की गई है। ऐसे समय में जब देश आर्थिक मंदी के बाद पटरी पर लौट रहा है तब हड़ताल से उद्योगों को भारी नुकसान पहुंचा है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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