मध्य प्रदेश में अक्षर ज्ञान से दूर है आधी नारी आबादी (साक्षरता दिवस 8 सितम्बर पर विशेष)
भोपाल, 7 सितम्बर (आईएएनएस)। अक्षर ज्ञान या यूं कहें कि शिक्षा, जीवनस्तर में सुधार लाने की पहली सीढ़ी है और महिला बालक की पहली गुरू होती है, मगर मध्य प्रदेश में बालक की पहली गुरू नारी की आधी आबादी ही उस अक्षर ज्ञान को हासिल कर पाई है, जिसके जरिए वह भावी पीढ़ी को जीवनस्तर में सुधार की सीख दे सकती है।
देश की 2001 की जनगणना के आधार पर तैयार आंकड़ों की बात की जाए तो साक्षरता दर के मामले में मध्य प्रदेश 25 वें स्थान पर बना है। औसत साक्षरता दर से भी मध्य प्रदेश एक प्रतिशत पीछे है और यह आंकड़ा 64़11 प्रतिशत तक ही पहुंच पाया है। वहीं पुरूष साक्षरता दर राष्ट्रीय दर से ज्यादा होकर 76़ 80 प्रतिशत है। इसके विपरीत नारी साक्षरता दर 50़ 28 प्रतिशत तक ही पहुंच पाई है।
प्रदेश में साक्षरता के मामले में नरसिंहपुर जिला अव्वल है जहां 78़ 34 प्रतिशत लोग साक्षर हैं। महिला साक्षरता भी यहां सबसे ज्यादा है। वहीं सबसे बुरा हाल झाबुआ का है जहां 37़ 08 प्रतिशत लोग ही साक्षर हो पाए हैं। महिला साक्षरता यहां 25़ 50 प्रतिशत ही है।
बालिका शिक्षा के लिए प्रदेश सरकार द्वारा न केवल अनेक योजनाएं चलाई जा रही हैं बल्कि सुविधाएं देकर विद्यालयों तक लाने की कोशिशें की जा रही है। नि:शुल्क पाठ्य पुस्तकें और गणवेश (ड्रेस) दी जा रही है, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय स्थापित किए हैं, छात्रावास स्थापित कर आवासीय सुविधा दी गई है और साइकिल के साथ सामान्य व निर्धन वर्ग की छात्राओं को छात्रवृत्ति दी जा रही है। इसके बावजूद महिला साक्षरता के मामले में प्रदेश देश में 28 वें स्थान पर है।
प्रदेश के 24 जिले ऐसे हैं जहां महिला साक्षरता 50 प्रतिशत से नीचे बनी हुई है। इनमें सबसे बुरा हाल जनजातीय बाहुल्य जिलों का है। झाबुआ में 25़ 50, बडवानी में 31़ 35, श्योपुर में 28़ 99 , धार में 38़ 62, सीधी में 36़ 43, डिंडौरी में 38़ 48 प्रतिशत महिलाए ही साक्षर हो पाई हैं।
सामाजिक कार्यकर्ता राहुल शर्मा प्रदेश की साक्षरता प्रतिशत और महिला साक्षरता को महज कागजी आकड़ा करार देते हैं। वे कहते हैं कि अंक और अक्षर ज्ञान साक्षरता नहीं है बल्कि जरूरत है कि इस अभियान को सतत शिक्षा में बदला जाए। ऐसा मध्य प्रदेश में नहीं हो पाया है। सच्चाई यह है कि कुछ समय तक शिक्षा से दूर रहने के कारण जो भी अंक और अक्षर ज्ञान हासिल किया जाता है, उसे लोग भूल जाते हैं। सरकार का ध्यान सिर्फ आंकड़ों की बाजीगरी तक ही रहता है।
शर्मा बताते हैं कि पिछले दिनों दिल्ली में साक्षरता को लेकर हुई बैठक में मध्य प्रदश की महिला साक्षरता पर चिंता जताने के साथ विशेष अभियान चलाने पर जोर दिया गया। प्रदेश सरकार ने भी 10 जिलों श्योपुर, झाबुआ, मंदसौर, मंडला, मुरैना, कटनी, दतिया, बैतूल, टीकमगढ तथा खरगोन को साक्षर भारत अभियान में शामिल करने की गुजारिश की है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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