वेदांता परियोजना को मंजूरी न देने की पर्यावरणविदों ने की सराहना
दिल्ली स्थित विज्ञान व पर्यावरण केंद्र ने पर्यावरण मंत्रालय के फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि वेदांता सभी नियमों की धज्जियां उड़ा रहा था। "यह ऐसा फैसला है जो उड़ीसा के गरीब और पिछड़े लोगों के हक में है। गरीबों को पर्यावरण का लाभ मिलेगा।"
ग्रीन समूह की सुनीता नारायण ने कहा कि यह स्पष्ट था कि परियोजना में पर्यावरण व वन कानूनों का उल्लंघन किया गया था। "यह ग्रीन लॉबी नहीं है, जो विकास का विरोध कर रही है। यह गरीब जनता है जो कह रही है कि विकास शीर्ष पर है लेकिन इसके बावजूद वे गरीब होते जा रहे हैं।"
पर्यावरण मंत्रालय के फैसले को देश के लिए बड़ी सफलता करार देते हुए पर्यावरणविद् बिट्ट सहगल कहते हैं, "यह आम जन की जीत है क्योंकि यदि इस परियोजना को मंजूरी मिल गई होती तो खनन से वनों को बहुत नुकसान पहुंचता। लोगों को तो खामियाजा भुगतना ही पड़ता, इसका प्रभाव शेरों, हाथियों इत्यादि पर पड़ता।"
उड़ीसा के वन्यजीव समाज के बिश्वजीत मोहंती ने खुशी का इजहार करते हुए कहा कि पर्यावरण मंत्रालय ने आखिकार सही कदम उठाया। "वे (वेदांता) कानूनों का हर मोड़ पर उल्लंघन कर रहे थे।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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