पाकिस्तान में बाढ़ से मोहनजोदड़ो स्थल को खतरा

पाकिस्तान के दक्षिणी प्रांत सिंध में सिंधु नदी के तट पर स्थित मोहनजोदड़ो का निर्माण 2400 ईसा पूर्व में हुआ था। यह बाढ़ की वजह से कम से कम सात बार नष्ट हो चुका है और हर बार इस खंडहर के ऊपरी हिस्से का पुनर्निमाण किया गया।

पाकिस्तान में यूनेस्को के एक प्रवक्ता जावेद अजीज ने कहा कि सुरक्षात्मक पर्वत स्कन्ध नदी के बहाव का सामना कर पाने में सक्षम नहीं हो सकते और सशक्त व प्राकृतिक बाढ़ शहर के लिए विनाशकारी हो सकती है।

अजीज कहते हैं कि लोगों का मानना है कि उनके जहन में इस साल की बाढ़ सबसे भयानक है और यह मोहनजोदड़ो के प्राचीन शहर के बचे अवशेषों को भी नष्ट कर सकती है।

पिछले सप्ताह भारी बारिश के चलते आई बाढ़ के कारण पश्चिमोत्तर क्षेत्र में भारी तबाही हुई है।

सिंध प्रांत में बाढ़ से हजारों गांवों के करीब 1.2 करोड़ लोग प्रभावित हुए हैं। इस आपदा में 1,600 से ज्यादा लोग मारे जा चुके हैं।

नदी से करीब दो किलोमीटर दूर मोहनजोदड़ो की खोज संयोग से 1922 में खुदाई के दौरान हुई थी।

इसे दुनिया का सबसे पुराना योजनाबद्ध तरीके से बसा शहर माना जाता है। करीब 240 हेक्टेयर में फैले मोहनजोदड़ो में केवल 10 फीसदी खुदाई हुई है।

मोहनजोदड़ो को बाढ़ से बचाने के लिए यूनेस्को ने एक अंतर्राष्ट्रीय अभियान चलाया था जो 1997 में समाप्त हुआ। इसके तहत 80 लाख डॉलर का निवेश किया गया।

बाढ़ से सुरक्षा के लिए 1992 में नदी के किनारे औसतन छह मीटर की ऊंचाई वाले पांच पर्वत स्कन्ध निर्मित किए गए थे।

अजीज कहते हैं, "फिर भी चिंता बनी हुई है कि इतिहास अपने आपको दोहरा सकता है और हम लोग हालात पर लगातार निगरानी रखे हुए हैं।"

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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