राष्ट्रमंडल खेल : प्रधानमंत्री से बयान की मांग, कलमाडी का इस्तीफा से इंकार (राउंडअप)

विपक्ष ने आरोप लगाया कि राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर जनता की गाढ़ी कमाई में से 100,000 करोड़ रुपये की 'लूट' हुई है। इसे देखते हुए सांसदों ने विस्तृत चर्चा के साथ-साथ संयुक्त सरकारी समिति द्वारा जांच की मांग की। इस संबंध में शहरी विकास मंत्री एस. जयपाल रेड्डी को शून्यकाल के दौरान सदन में बोलने नहीं दिया गया। रेड्डी इस मामले में अपना पक्ष स्पष्ट करना चाहते थे।

रेड्डी को सदन में बोलने से रोकने पर कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सांसदों के बीच गरमागरम बहस शुरू हो गई। इस कारण सदन की कार्यवाही दोपहर दो बजे तक स्थगित कर दी गई।

इससे पहले, मुलायम सिंह के नेतृत्व में समाजवादी पार्टी (सपा) के सांसदों ने राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर जारी धांधली के विरोध में सदन का बहिष्कार किया।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के नेता गुरुदास दासगुप्ता ने शून्यकाल में सरकार पर आरोप लगाया कि उसकी नाकों के नीचे राष्ट्रमंडल खेल के नाम पर 'अनियमितताएं और गलत कार्य' जारी हैं।

जद (यू) के अध्यक्ष शरद यादव ने आरोप लगाया कि राष्ट्रमंडल खेलों के नाम पर अब तक '100,000' करोड़ रुपये का घोटाला हो चुका है। शरद यादव ने कहा, "मैं यह साबित कर सकता हूं। मेरे पास इसके कागजी साक्ष्य हैं। यह घोटाला बहुत योजनाबद्ध तरीके से किया गया है।"

संसद में बोलने से रोके जाने के बाद रेड्डी ने कहा कि आयोजन समिति एक स्वतंत्र इकाई है और उसके खिलाफ अनियमितता के आरोपों की जांच की जा सकती है। रेड्डी ने संसद भवन के बाहर कहा, "आयोजन समिति एक स्वतंत्र इकाई है। अगर उसकी कार्यप्रणाली में किसी प्रकार की अनियमितता दिखाई देगी तो सरकार उसके खिलाफ जांच शुरू कर सकती है।"

उधर, कलमाडी ने कहा कि वह अपने पद पर बने रहेंगे और खेलों के आयोजन तक पूरे जोरशोर के साथ सक्रिय रहेंगे क्योंकि राष्ट्रमंडल खेल उनका सपना है। उन्होंने कहा कि वह इसके सफल आयोजन तक अपने तमाम अधिकारियों का मार्गदर्शन करते रहेंगे।

कलमाडी ने कहा, "मैं किसी भी आधार पर इस्तीफा नहीं दूंगा। राष्ट्रमंडल खेल मेरा सपना है और इसे पूरा कराए बगैर मैं अपना पद नहीं छोड़ूंगा। जहां तक अनियमितताओं की बात है तो इसकी जांच चल रही है और अब तक जिन लोगों को दोषी पाया गया है, उन्हें निलंबित कर दिया गया है। उनके खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय की जांच चल रही है और तब तक ये लोग निलंबित रहेंगे।"

आयोजन समिति ने पिछले साल अक्टूबर में लंदन में आयोजित क्वींस बेटन रिले के आयोजन में अनियमितता बरतने को लेकर अपने तीन प्रमुख अधिकारियों को गुरुवार को निलंबित कर दिया था। निलंबित अधिकारी महानिदेशक स्तर के हैं जबकि एक अन्य अनियमितता को लेकर आयोजन समिति के कोषाध्यक्ष अनिल खन्ना को इस्तीफा देना पड़ा था।

इस बीच, देश के सर्वोच्च खेल सम्मान-राजीव गांधी खेल रत्न के लिए नजरअंदाज किए जाने पर अग्रणी निशानेबाज गगन नारंग ने शुक्रवार को राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं लेने की धमकी दी है।

गगन ने कहा कि सरकार के इस कदम ने उन्हें हतोत्साहित कर दिया है और यही कारण है कि वह अक्टूबर में नई दिल्ली में होने वाले राष्ट्रमंडल खेलों से अपना नाम वापस लेने के बारे में सोच रहे हैं।

नारंग ने कहा, "मैं बेहद निराश हूं। मैं फिलहाल कुछ समय तक खेलों से ब्रेक लेने के बारे में सोच रहा हूं।" विश्व के दूसरे वरीयता प्राप्त निशानेबाज नारंग 2012 में लंदन में होने वाले ओलंपिक खेलों के लिए क्वालीफाई करने वाले पहले भारतीय हैं।

राष्ट्रमंडल खेलों की सुरक्षा सरकार के लिए अहम मुद्दा है लेकिन इसका आयोजन जिन स्टेडियमों में होना है, उनमें से सिर्फ दो अग्नि सुरक्षा प्रणाली से लैस हैं। इन स्टेडियमों को ही अग्निशमन विभाग ने अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) दिया है जबकि बाकी के आयोजन स्थलों पर अग्नि सुरक्षा की फिलहाल कोई व्यवस्था नहीं है।

दिल्ली फायर सर्विस के प्रमुख आर.सी. शर्मा ने आईएएनएस से कहा, "अभी तक सिर्फ छत्रसाल स्टेडियम और त्यागराज स्टेडियमों को एनओसी दिया गया है। बाकी के स्टेडियमों में निरीक्षण का काम चल रहा है। इनमें जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम भी शामिल है। निरीक्षण के बाद ही इन स्टेडियमों में अग्नि सुरक्षा प्रणाली लगाई जा सकेगी।"

शर्मा ने बताया कि 3-14 अक्टूबर तक होने वाले आयोजन के दौरान अग्नि शमन विभाग ने तीन स्तरीय सुरक्षा व्यवस्था की तैयारी की है। इसके लिए 600 अधिकारियों को सुरक्षित रखा गया है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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