भारत, अमेरिका के बीच पुनप्र्रसंस्करण समझौता (लीड-1)
वाशिंगटन, 31 जुलाई (आईएएनएस)। भारत और अमेरिका ने शुक्रवार को परमाणु ईंधन पुनप्र्रसंस्करण समझौते पर हस्ताक्षर करके दोनों देशों के बीच हुए असैन्य परमाणु सहयोग समझौते को लागू करने की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाया।
अमेरिका में भारत की राजदूत मीरा शंकर और अमेरिकी विदेश उपमंत्री विलियम बर्न्स ने समझौते पर हस्ताक्षर किए। इसके तहत अमेरिकी ईंधन के पुनप्र्रसंस्करण के लिए अंतर्राष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सुरक्षामानकों के अधीन एक नया पुनप्र्रसंस्करण संयंत्र बनाया जाएगा।
भारत के बढ़ते परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में अमेरिकी कंपनियों के निवेश को शुरू करने के लिए बचे कुछ आवश्यक कदमों में एक यह समझौता भी शामिल था। अमेरिकी पक्ष अब भारत द्वारा परमाणु दायित्व विधेयक को पारित किए जाने का इंतजार कर रहा है। इससे अमेरिकी कंपनियां भारत के करीब 150 अरब डॉलर के परमाणु ऊर्जा बाजार का लाभ उठाने में सक्षम हो सकेंगी।
समझौते को दोनों देशों के बीच गहराते संबंधों का प्रतीक बताते हुए शंकर ने कहा कि भारत को अब राष्ट्रपति बराक ओबामा के नवंबर दौरे का इंतजार है।
शंकर ने कहा, "हमें भरोसा है कि यह दौरा दोनों देशों के संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा। मौजूदा वैश्विक चुनौतियों से निपटने और एशिया तथा उसके परे शांति को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच का सहयोग भी इससे सामने आएगा।"
उन्होंने कहा कि भारत का अपनी मौजूदा परमाणु ऊर्जा का उत्पादन सात गुना बढ़ाकर वर्ष 2022 तक 35,000 मेगावॉट करने और वर्ष 2032 तक 60,000 मेगावॉट करने की महत्वाकांक्षी योजना है।
शंकर ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों सहित अंतर्राष्ट्रीय सहयोग इस योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
अमेरिकी विदेश विभाग ने कहा कि यह समझौता प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और ओबामा द्वारा भारत-अमेरिका नागरिक परमाणु समझौते के पूर्ण कार्यान्वयन की प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाएगा।
अमेरिका ने परमाणु ईंधन के पुनप्र्रसंस्करण का समझौता अब तक केवल यूरोपीय संघ (ईयू) और जापान के साथ किया है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।
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