असुविधाओं ने चेरापूंजी की पर्यटन संभावनाओं पर पानी फेरा

चेरापूंजी, (मेघालय) 31 जुलाई (आईएएनएस)। गहरी घाटियों में गिरने वाले झरनों के लिए चर्चित इस शहर का दूसरा नाम दिया गया सोहरा जो जादुई वर्षा के कारण विश्व के सबसे भीगे स्थल के रूप में प्रसिद्ध है। लेकिन सुविधाओंे के अभाव में यह शहर 'तीसरे दर्जे का गंतव्य' बन गया है।

राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष एच.टी. संगलियाना ने आईएएनएस से कहा, "चेरापूंजी तीसरे दर्जे की गंतव्य है। मैंने अनुभव किया कि वहां जाने वाले पर्यटक स्वयं को ठगा महसूस करते हैं।"

उल्लेखनीय है कि चेरापूंजी पूर्वी खासी जिले के दक्षिणी तराई वाले इलाके में पठारों के किनारे पर बसी हुई है। यह शहर समुद्र तल से 1,290 मीटर की ऊंचाई पर बसा है और राज्य की राजधानी शिलांग से 56 किलोमीटर दूर है। यह विश्व में सबसे अधिक वर्षा वाले क्षेत्र के रूप में जाना जाता है।

इस शहर में प्रतिवर्ष औसत वर्षा 12,000 मिलीमीटर दर्ज की जाती है। वर्ष 1974 में सबसे अधिक 24,555 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई थी।

अधिक वर्षा के कारण यहां दुर्लभ वनस्पति उपजते हैं। यही वजह है कि यह शहर पर्यटकों को आकर्षित करता है।

सांसद एवं भारतीय पुलिस सेवा के पूर्व अधिकारी सांगलियाना कहते हैं कि चेरापूंजी जाने वाली सड़क की दशा बेहद खराब है।

इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।

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