कलमाडी ने वित्तीय अनियमितता को बकवास बताया

समाचार चैनल 'टाइम्स नाउ' ने शुक्रवार की रात खबर दी थी कि ब्रिटिश सरकार ने राष्ट्रमंडल खेलों की आयोजन समिति द्वारा ब्रिटेन के राजस्व व सीमा शुल्क विभाग को लिखे एक पत्र के बाद ब्रिटेन की एक कंपनी को कथित रूप से धन के स्थानांतरण के मामले की जांच शुरू की है।
समाचार चैनल ने दावा किया है कि आयोजन समिति से करारबद्ध एक नई कंपनी को बिना किसी उचित करार और अनुमति के हजारों पाउंड की धनराशि स्थानांतरित की गई है। इस खुलासे के बाद भारतीय ओलंपिक एसोसिएशन के अध्यक्ष कलमाडी ने शनिवार को एक संवाददाता सम्मेलन आयोजित कर इन आरोपों को निराधार बताते हुए कहा कि लंदन की कंपनी का चयन निविदा प्रक्रिया के तहत किया गया था।
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कलमाडी ने कहा, "लंदन में आयोजित कार्यक्रम का बजट 13 करोड़ रुपये था, लेकिन हमने मात्र छह करोड़ रुपये खर्च किए। हमने इसके लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) से अनुमति भी ली थी और वहां से मुझे सभी आवश्यक मंजूरी मिली थी।"
कलमाडी ने कहा, "टाइम्स नाउ की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सीमा शुल्क डिजाइन के लिए 25,000 पाउंड दिए गए। यह सही नहीं है। मुझे नहीं पता कि यह जानकारी उन्हें कहां से मिली है।"
चैनल ने दावा किया है कि भारतीय उच्चायोग ने लंदन में पिछले वर्ष अक्टूबर में क्वींस बैटन रिले की लांचिंग के दौरान आयोजन समिति से एएम फिल्म्स यूके लिमिटेड को धन स्थानांतरण के आरोपों पर खेल मंत्रालय को पत्र लिखा है।
लेकिन कलमाडी का कहना है कि भारतीय उच्चायोग ने ही लंदन में आयोजन के लिए कार किराए पर लेने और मोबाइल स्क्रीन तथा शौचालय लगाने के लिए एएम फिल्म्स यूके लिमिटेड और उसकी सहयोगी कंपनी का सुझाव दिया था।
कलमाडी ने कहा, "हमें एएम फिल्म्स से करार करने के लिए भारतीय उच्चयोग से मंजूरी मिली थी। मुझे उच्चायोग से 13 अक्टूबर को राजू सेबस्तियन का ईमेल मिला था, उसमें कंपनी का नाम और दर सुझाया गया था। हमने सभी मामलों को पारदर्शी तरीके से निपटाया है।"
कलमाडी ने कहा कि 238,093.56 पाउंड का भुगतान एएम कार एंड वैन हायर लिमिटेड को और 146,868.80 पाउंड का भुगतान एएम फिल्म्स यूके लिमिटेड को मोबाइल वीडियों स्क्रीन किराए पर लेने के लिए 24 अक्टूबर को भुगतान किया गया था।
कलमाडी ने यह भी कहा कि ब्रिटिश सरकार ने आयोजन समिति से वैट रिफंड के लिए कहा। उन्होंने कहा, "यदि कोई गड़बड़ी थी तो हमसे वैट रिफंड के लिए क्यों कहा गया।" कलमाडी ने ब्रिटेन से इस मामले में जांच के लिए कोई पत्र मिलने से इंकार किया है। कलमाडी ने कहा कि देश को राष्ट्रमंडल खेलों की मेजबानी मिलना अच्छी शुरुआत रही और इसका अंत भी बढ़िया होगा।
लंदन में भारतीय उप उच्चायुक्त राजेश एन.प्रसाद के ब्रिटिश सरकार के भ्रष्टाचार के आरोपों के बारे में खेल मंत्रालय को लिखने के बाद इस कथित घोटाले का खुलासा हुआ। इसमें कहा गया कि भारत से राष्ट्रमंडल खेल समिति ने ब्रिटेन की एएम फिल्म्स को 25,000 पाउंड की रकम भेजी है। इसका कोई हिसाब नहीं है।
ब्रिटिश कर कार्यालय ने इसके बाद जून में भारतीय उच्चायोग को एक पत्र लिखा और जांच शुरू की। आयोजन समिति के महासचिव ललित भनोट ने इन सभी आरोपों से इंकार करते हुए कहा कि ब्रिटेन की किसी भी कंपनी को अवैध भुगतान नहीं किया गया और भारतीय रिजर्व बैंक की अनुमति के बाद ही सभी भुगतान किए गए।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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