दिल्ली प्रशासन के लिए सिरदर्द बने भिखारी
राजीव रंजन द्विवेदी
नई दिल्ली, 31 जुलाई (आईएएनएस)। दिल्ली में रहने वाले 60,000 से अधिक भिखारी दिल्ली प्रशासन के लिए सिरदर्द बन गए हैं। राष्ट्रमंडल खेल सिर पर है और सरकार दिल्ली को साफ-सुथरा बनाने में जुटी हुई है, लेकिन सड़कों से भिखारियों को हटाना उसके लिए चूहा-बिल्ली का खेल साबित हो रहा है।
चूंकि अक्टूबर में होने वाले राष्ट्रमंडल खेल करीब आ पहुंच चुके हैं, लिहाजा दिल्ली सरकार के समाज कल्याण मंत्रालय ने कहा है कि भिखारियों के खिलाफ अभियान में तेजी लाई जानी चाहिए। दिल्ली में भीख मांगना अनधिकृत गतिविधि के तहत आता है।
एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने आईएएनएस को बताया, "दिल्ली में भिखारियों के खिलाफ अभियान में संतोषजनक प्रगति नहीं है।"
अधिकारी ने कहा, "अभियान से जुड़े अधिकारियों की एक बैठक में समाज कल्याण मंत्री मंगत राम सिंघल ने इस अभियान पर साप्ताहिक रिपोर्ट मांगी है। इसके लिए अभी बहुत कुछ करने की आवश्यकता है।"
सरकारी आंकड़े के अनुसार राजधानी में लगभग 60,000 भिखारी हैं। इनमें से 30 प्रतिशत की उम्र 18 वर्ष से कम है। लगभग 69.94 प्रतिशत पुरुष और 30.06 प्रतिशत महिलाएं हैं। लेकिन गैरसरकारी संगठनों का कहना है कि राजधानी में भिखारियों की संख्या 100,000 से अधिक है।
राजधानी में तीन से 14 अक्टूबर तक चलने वाले खेलों के दौरान लगभग 100,000 विदेशी पर्यटकों के आने की संभावना है। इस लिहाज से सरकार नई दिल्ली रेलवे स्टेशन, कनॉट प्लेस, खान मार्केट और हनुमान मंदिर इलाकों में भिखारियों के खिलाफ अभियान पर विशेष ध्यान दे रही है। लेकिन ये इलाके फिर भी भिखारियों से मुक्त होने का नाम नहीं ले रहे।
एक सरकारी सूत्र के अनुसार वाहनों के जरिए भिखारियों को पकड़ने की वर्तमान रणनीति पूरी तरह विफल साबित हुई है। इससे अधिकारियों की चिंताएं बढ़ गई हैं कि आखिर भिखारियों को कैसे पकड़ा जाए।
अधिकारी ने कहा, "फिलहाल हमारा प्रवर्तन दल एक वाहन में सवार होकर भिखारियों को पकड़ने जाता है, लेकिन भिखारी ज्यादा चालाक हैं, क्योंकि वे वाहन देखते ही वहां से गायब हो जाते हैं। प्रवर्तन दल के वहां से चले जाने के बाद वे वापस लौट आते हैं।"
अधिकारी ने कहा, "लेकिन हमारे अधिकारियों के दौरे के दौरान भिखारियों के वहां से भाग जाने में एक अच्छी बात यह छिपी है कि, जब वे भाग जाते हैं, तो एक तरह से हमारा उद्देश्य हल हो जाता है।"
दिल्ली और 17 अन्य राज्यों में बंबई प्रीवेंशन ऑफ बेगिंग एक्ट-1959 का इस्तेमाल किया जा रहा है। यह कानून पुलिस को इस बात की अनुमति देता है कि भीख मांगने वाले किसी भी व्यक्ति को वह गिरफ्तार कर सकती है।
भिखारियों के खिलाफ जारी सरकारी अभियान पर सामाजिक कार्यकर्ताओं ने आपत्ति खड़ी की है।
गैर सरकारी संगठन आश्रय अधिकार अभियान के संजय कुमार ने कहा कि भिखारियों के खिलाफ अभियान सफल नहीं होगा, क्योंकि व्यवस्था इसकी इजाजत नहीं देती।
संजय कुमार ने कहा, "भिखारियों को आतंकित कर उन्हें सलाखों के पीछे धकेलने की क्या जरूरत है? इस अभियान की अपनी समस्याएं हैं, क्योंकि व्यवस्था खुद इसकी सफलता की अनुमति नहीं देती।"
संजय कुमार ने कहा, "यहां ऐसे लोग हैं जो भिखारियों को किराए पर रखते हैं, यहां तक कि शहर के बाहर भी। इसलिए इस समस्या की जड़ में जाने की जरूरत है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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