अदालतों में 3 करोड़ बकाया मामले? राष्ट्रपति चाहती हैं समीक्षा
प्रधान न्यायाधीश एस.एच.कपाड़िया ने तीन करोड़ मुकदमे बकाया बताए जाने का विरोध करते हुए कहा कि इनमें से 50 प्रतिशत मुकदमे केवल एक वर्ष पहले ही दायर किए गए हैं। उन्होंने कहा कि इन मामलों को केवल 'लंबित' कहा जा सकता है 'बकाया' नहीं।
इसकी प्रतिक्रिया में राष्ट्रपति ने आकंड़ों की समीक्षा करने को कहा।
न्यायिक सुधारों पर एक सम्मेलन के उद्धाटन भाषण में पाटील ने कानूनी ढांचे से जुड़े लोगों से बकाया मामलों की समीक्षा के लिए नए तरीके अपनाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वादी के पास केवल एक जीवन होता है लेकिन मुकदमे पीढ़ियों तक चलते हैं।
दो दिवसीय इस सम्मेलन का आयोजन कॉन्फेडरेशन ऑफ इंडियन बार ने किया।
पाटील ने कहा कि न्यायिक प्रशासन को नुकसान पहुंचाने वाले पुराने कानूनों को समाप्त या उनमें उपयुक्त सुधार किया जाना चाहिए।
उन्होंने कहा, "न्यायिक जवाबदेही और न्यायिक स्वतंत्रता का सह अस्तित्व है।"
प्रधान न्यायाधीश कपाड़िया ने विधायी, न्यायिक और बार में सुधारों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि केवल न्यायिक सुधार अकेले काम नहीं कर सकते। आप केवल एक पहिए पर गाड़ी को नहीं चला सकते।
उन्होंने कहा कि अपराध प्रक्रिया संहिता की धारा 24 के तहत लोक अभियोजकों की नियुक्ति में उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश से परामर्श लेने की बाध्यता के नियम को सरकार द्वारा हटाए जाने के बाद से सरकारी वकीलों की गुणवत्ता में गिरावट आई है।
उन्होंने कहा, "यह शक्ति क्यों वापस ली गई। मैं इस पर टिप्पणी नहीं करना चाहता।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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