अमेरिका में फिर से मंदी की आंशका गहराई
वाशिंगटन, 31 जुलाई (आईएएनएस)। वर्ष की दूसरी तिमाही में आर्थिक वृद्धि दर के धीमा होने और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के अमेरिका की वित्तीय व्यवस्था के अभी भी कमजोर होने की बात कहने के बाद वहां फिर से मंदी की आशंका गहराने लगी है।
वाणिज्य विभाग ने शुक्रवार को कहा कि अमेरिकी अर्थव्यवस्था में दूसरी तिमाही में भी वृद्धि जारी रही और 30 जून को समाप्त हुई अवधि में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में वृद्धि की दर उम्मीद से धीमी होकर 2.4 प्रतिशत रही।
बैंकों की वित्तीय हालत के परीक्षण के परिणामों का उल्लेख करते हुए आईएमएफ ने कहा कि अमेरिकी बैंकिंग व्यवस्था स्थिर लेकिन अभी भी कमजोर है और उसे अतिरिक्त 76 अरब डॉलर की जरूरत हो सकती है।
अमेरिका अर्थव्यवस्था में वृद्धि की दर पहली तिमाही की 3.7 प्रतिशत वृद्धि दर से नीचे आ गई और 2.5 प्रतिशत वृद्धि के अनुमान को भी हासिल करने में विफल रही।
समाचार चैनल सीएनएन ने कहा कि लगातार चौथी तिमाही में आर्थिक वृद्धि के जारी रहने से कुछ अर्थशास्त्रियों की इस धारणा को बल मिला है कि दिसंबर 2007 में शुरू मंदी 2009 के मध्य में खत्म होने की संभावना है।
व्हाइट हाउस की आर्थिक सलाहकार परिषद की अध्यक्ष क्रिस्टिना रोमर ने कहा, "आर्थिक वृद्धि की ठोस दर प्रदर्शित करती है कि अर्थव्यवस्था में तेज सुधार जारी है।"
उन्होंने कहा कि बेरोजगारी में कमी लाने के लिए और तेज सुधार की जरूरत है।
शुक्रवार को वार्षिक जीडीपी की समीक्षा में संकेत मिला कि आर्थिक गिरावट सरकार के अनुमानों से अधिक है और सुधारों की गति धीमी है।
वर्ष 2007 की पहली तिमाही में जब मंदी आधिकारिक तौर पर शुरू हुई थी और वर्ष 2009 में जब कई अर्थशास्त्री मंदी के समाप्त होने की बात कह रहे थे, जीडीपी में 4.1 प्रतिशत की गिरावट हुई। वर्ष 1947 के बाद से यह सबसे गहरी मंदी है। सरकार का अनुमान था कि इस अवधि में जीडीपी में 3.7 प्रतिशत की गिरावट आएगी।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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