चीन-पाकिस्तान से निपटने भारत ने तेज की एनएसजी कूटनीति
मनीष चांद
नई दिल्ली, 25 जुलाई (आईएएनएस)। चीन-पाकिस्तान के परमाणु समझौते के खिलाफ अमेरिका खुल कर सामने आ सकता है, लेकिन इस मामले में भारत भी अपनी तरफ से कोई मौका नहीं छोड़ रहा है। भारत ने 46 राष्ट्रों के परमाणु आपूर्तिकर्ता समूह (एनएसजी) की विएना में होने वाली अगली बैठक के पहले उसके प्रमुख सदस्यों के साथ अपनी राजनयिक गतिविधियां तेज कर दी है।
भारत ने न केवल एनएसजी के चार बड़े सदस्यों (अमेरिका, फ्रांस, रूस और ब्रिटेन) के साथ संपर्क साधा है, बल्कि इस समझौते के वैश्विक अप्रसार व्यवस्था और दक्षिण एशिया में सुरक्षा के कमजोर हालात पर पड़ने वाले नकारात्मक असर को सामने लाने के लिए अन्य एनएसजी सदस्यों से भी संपर्क कर रहा है।
सरकार के करीबी सूत्रों ने आईएएनएस को बताया कि सरकार ने इन प्रमुख एनएसजी देशों में स्थित अपने दूतावासों से कहा है कि वे इस समझौते के कुपरिणामों के बारे में अवगत कराएं और इस बारे में भी अवगत कराएं कि यह भारत के महत्वपूर्ण हितों के खिलाफ किस तरह हमला करता है।
सूत्रों ने कहा कि भारत-अमेरिका संबंधों पर ट्रैक 2 संवाद में लगे भारतीय समूह ने विभिन्न स्तरों पर समझौते से निपटने के लिए कोई रणनीति तैयार करने हेतु शुक्रवार को बैठक की। ट्रैक 2 समूह में अमेरिका में पूर्व भारतीय राजदूत नरेश चंद्रा और वाइस एडमिरल (सेवानिवृत्त) पी.एस.दास जैसे पूर्व राजनयिक और सुरक्षा विशेषज्ञ शामिल हैं। ये दोनों विशेषज्ञ भारत-चीन ट्रैक 2 संवाद प्रक्रिया में भी शामिल हैं।
सूत्रों ने आगे कहा कि विदेश सचिव निरूपमा राव और पाकिस्तान व चीन के मामलों को देखने वाले संयुक्त सचिव द्वय, वाई.के.सिन्हा और गौतम बंबावाले ने भी चर्चा में हिस्सा लिया।
भारत की जवाबी हमले की रणनीति तीन महत्वपूर्ण बिंदुओं के इर्द-गिर्द घूमेगी। पहला यह कि चास्मा-3 और चास्मा-4 दो अतिरिक्त रिएक्टरों की आपूर्ति के लिए चीन का सौदा पूर्व की किसी व्यवस्था में मूर्तरूप नहीं लिया था, जैसा कि चीन दावा कर रहा है। चीन ने 2004 में एनएसजी में शामिल होते समय दोनों अतिरिक्त रिएक्टरों के बारे में खुलासा नहीं किया था।
दूसरा यह कि भारतीय वार्ताकार यह आग्रह करेंगे कि भारत-अमेरिका परमाणु समझौते से चीन-पाकिस्तान परमाणु समझौते की कोई तुलना नहीं है, क्योंकि नई दिल्ली को उसके सर्वविदित बेदाग अप्रसार रिकार्ड के आधार पर एनएसजी द्वारा रियायत दी गई थी।
तीसरा बिंदु यह कि भारत यह कहेगा कि यह कोई ऊर्जा के लिए समझौता नहीं है, बल्कि पाकिस्तान की परमाणु हथियार निर्माण की क्षमता को मजबूत कर नई दिल्ली को टक्कर देने की राजनीति है। इसके साथ ही भारत इस बात को भी रेखांकित करेगा कि इस्लामाबाद विदेशों से मिल रही आर्थिक मदद का इस्तेमाल अपनी सैन्य मशीनरी के आधुनिकीकरण में कर रहा है।
एनएसजी की बैठक विएना में सितंबर में होने की संभावना है।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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