उल्फा के साथ शांति वार्ता सही दिशा में : गोगोई
गुवाहाटी, 11 जुलाई (आईएएनएस)। असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने रविवार को उन कयासों को खारिज कर दिया, जिसमें कहा जा रहा था कि प्रतिबंधित युनाइटेड लिबरेशन फ्रंट ऑफ असम (उल्फा) के साथ शांति प्रक्रिया अवरुद्ध हो गई है। गोगोई ने कहा कि शांति प्रक्रिया सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
गोगोई ने पत्रकारों को बताया, "शांति प्रक्रिया में कोई रुकावट नहीं आई है और वह निश्चित रूप से सही रास्ते पर हैं।"
गोगोई ने कहा कि भारत से उल्फा के उन नेताओं को शांति प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश की जा रही है, जो देश से बाहर हैं। उन्होंने कहा, "हम बांग्लादेश और म्यांमार में स्थित उल्फा नेताओं से संपर्क स्थापित करने और उन्हें यहां लाकर शांति प्रक्रिया में जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।"
उल्फा के कमांडर-इन-चीफ परेश बरुआ को छोड़ कर बाकी संगठन के सभी शीर्ष नेता जेल में हैं। जेल में कैद नेताओं में संगठन के अध्यक्ष अरविंद राजखोवा, उप कमांडर-इन-चीफ राजू बरुआ, स्वयंभू विदेश सचिव सशा चौधरी, वित्त सचिव चित्रबोन हजारिका, सांस्कृतिक सचिव प्रणति डेका और उल्फा के राजनीतिक विचारक भीमकांता बरगोहैन शामिल हैं।
उल्फा के दो अन्य नेता, उल्फा के उपाध्यक्ष प्रदीप गोगोई और प्रचार प्रमुख मिथिंगा दैमरी जमानत पर जेल से बाहर हैं और शांति वार्ता शुरू करने के लिए जनसमर्थन जुटाने में लगे हुए हैं।
जेल में कैद अधिकांश नेताओं ने सरकार के साथ शांति वार्ता शुरू करने की इच्छा जाहिर की है।
मुख्यमंत्री ने कहा, "हम चाहते हैं कि परेश बरुआ आकर शांति वार्ता में हिस्सा ले, लेकिन हम अनिश्चितकाल तक उसका इंतजार नहीं कर सकते। फिर भी एक बात तय है कि शांति वार्ता तो शुरू होगी।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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