प्रतिस्पर्धा के चलते दूरसंचार क्षेत्र की विकास दर घटी
नई दिल्ली, 11 जुलाई (आईएएनएस)। देश में दूरसंचार क्षेत्र में चल रहा 'टैरिफ युद्ध' इस क्षेत्र की कंपनियों की आय हजम कर रहा है। यही वजह है कि इस क्षेत्र की विकास दर 20 फीसदी से घटकर 2.5 प्रतिशत रह गई है।
वर्ष 2009-10 में काल दरों में बेतहाशा कमी करने वाली कंपनियों की आपसी प्रतिस्पर्धा के चलते दूरसंचार क्षेत्र की विकास दर महज 2.5 प्रतिशत रही है जबकि इससे पिछले साल आर्थिक मंदी के दौर में भी इन क्षेत्र की विकास दर 20 प्रतिशत रही थी।
औद्योगिक जर्नल 'वाइस एण्ड डाटा' में प्रकाशित सर्वे रिपोर्ट में कहा गया, "कंपनियों के बीच तीखे टैरिफ युद्ध के कारण पूरे क्षेत्र के विकास पर असर पड़ा है। ऐसी कंपनियां जो इस क्षेत्र में तेज विकास को बढ़ावा दे रही थीं उनकी आय में भी भारी कमी आई है।"
दूरसंचार उद्योग वर्ष 2009-10 में आंतरिक प्रतिस्पर्धा से घिरा रहा जिससे इसकी विकास दर घटकर 2.5 प्रतिशत रह गई है। पिछले साल के 1,59,510 करोड़ रुपये की आय के मुकाबले इस साल इस क्षेत्र की आय 1,55,683 करोड़ रुपये रही है।
आय के इन आंकड़ों में मोबाइल, लैंड लाइन, राष्ट्रीय सुदूर सेवाएं, अंतर्राष्ट्रीय सुदूर सेवाएं, ब्राडबैंड और रेडियो कॉल व्यापार की आय शामिल है।
इस क्षेत्र में नई उतरी कंपनियों द्वारा पहले अपनाई गई एक पैसा प्रति कॉल की दर से कंपनियों की आय में भारी कमी आई है।
इस क्षेत्र में ग्राहकों की संख्या में हालांकि 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है लेकिन कंपनियों की आय केवल 3.6 प्रतिशत बढ़कर 96,860 करोड़ रुपये हुई है।
इस क्षेत्र की तीन बड़ी कंपनियों भारती, रिलायंस और वोडाफोन के पास दस-दस करोड़ से ज्यादा ग्राहक हो गए हैं।
लैंडलाइन फोन उपभोक्ताओं की संख्या में वर्ष 2009-10 में 23.3 प्रतिशत और आय में 18,900 करोड़ रुपये की कमी आई है।
साइबर मीडिया इंडिया के मुख्य संपादक प्रशांत के राय ने कहा, "पिछले पांच सालों में यह दूरसंचार क्षेत्र की आय का सबसे खराब प्रदर्शन है, प्रतिस्पर्धा का इतना कड़ा माहौल ज्यादा दिनों तक नहीं चल सकता आगे हालात कुछ स्थिर हो सकते हैं।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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