पार्टियां नहीं तय कर पाईं नए प्रधानमंत्री का नाम
काठमांडू, 11 जुलाई (आईएएनएस)। वर्ष 2009 में पहली माओवादी सरकार के पतन के साथ ही नेपाल में शुरू हुआ संकट रविवार को और गहरा गया। पार्टियां लगातार एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप में लगी हुई हैं और नए प्रधानमंत्री का नाम तय नहीं कर पाई हैं।
कुल 25 संसदीय पार्टियों को प्रधानमंत्री माधव कुमार नेपाल की कार्यवाहक सरकार के स्थान पर सोमवार तक एक नई सर्वसम्मत सरकार बना लेने की जरूरत है। नेपाल ने 30 जुलाई को पद से इस्तीफा दे दिया था।
नए प्रधानमंत्री का नाम छह जुलाई तक तय हो जाना चाहिए था। लेकिन चूंकि पार्टियां किसी सहमति पर नहीं पहुंच पाईं, लिहाजा राष्ट्रपति राम बरन यादव ने प्रधानमंत्री तय करने की समय सीमा सोमवार तक बढ़ा दी थी।
अब ऐसा लगता है कि नेपाल भंवर में उलझ गया है। क्योंकि प्रमुख पार्टियां राष्ट्रीय हित को ध्यान में रखे बगैर मूल्यवान समय बर्बाद कर रही हैं।
माओवादियों ने पार्टियों से सुलह करने के बदले उन्हें नाराज कर दिया है, क्योंकि उन्होंने अवरुद्ध शांति प्रक्रिया को आगे ले जाने के लिए अपनी योजना सामने रख दी है।
पूर्व गुरिल्लाओं का कहना है कि वे अपने युवा धड़े (यंग कम्युनिस्ट लीग) यानी अपने अर्धसैन्य बल को, साथ ही 19,000 से अधिक लड़ाकों वाली गुरिल्ला सेना को समाप्त करने को तैयार हैं।
माओवादी, अपनी पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) को एक विशेष समिति के तहत रखे जाने की वकालत कर रहे हैं। वह समिति तय करेगी कि कितने लड़ाके राष्ट्रीय सेना में शामिल किए जाएंगे।
माओवादी चाहते हैं कि प्रत्येक कार्यमुक्त किए जाने वाले लड़ाके को अपनी नई जिंदगी शुरू करने के लिए 10 लाख नेपाली रुपये दिए जाएं। जो लड़ाके सेना से जुड़ना चाहते हैं, उन्हें अंतर्राष्ट्रीय भर्ती नियमों के अनुसार सेना में शामिल किया जाना चाहिए।
माओवादियों का कहना है कि यदि सेना, गुरिल्लाओं को अपने साथ स्वीकार नहीं करना चाहती तो ऐसी सूरत में माओवादी लड़ाकों की अलग इकाइयां बनाई जाए।
लेकिन इस प्रस्ताव को सत्ताधारी पार्टियों ने सिरे से खारिज कर दिया है। पार्टियों ने कहा है कि यह एकतरफा प्रस्ताव है और 2006 में हुए शांति समझौते के खिलाफ है।
प्रधानमंत्री नेपाल भी अपनी पार्टी के एक कार्यकर्ता, छाबी कार्की की हत्या के लिए माओवादियों को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। कार्की की गुरुवार को ओखलधुंगा जिले में चाकू गोद कर हत्या कर दी गई थी।
नेपाल ने दिवंगत स्थानीय नेता की स्मृति में आयोजित श्रद्धांजलि सभा में शनिवार को कहा था, "माओवादी एक आपराधिक पार्टी है। वह अभी एक सामान्य पार्टी में रूपांतरित नहीं हो पाई है। हम कार्की के हत्यारों के खिलाफ कानून के मुताबिक कार्रवाई करेंगे।"
जैसा कि स्पष्ट हो गया है कि पार्टियां सोमवार तक किसी प्रधानमंत्री के नाम पर सहमत नहीं हो पाएंगी। ऐसे में राष्ट्रपति, उनसे किसी एक उम्मीदवार को प्रस्तुत करने के लिए कहेंगे, जो कि 601 सदस्यीय संसद में बहुमत साबित कर सके।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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