भारत बंद (प्रतिक्रियाएं) : किसने क्या कहा (राउंडअप)
लालकृष्ण आडवाणी (भाजपा संसदीय दल के अध्यक्ष) :- "राजग भारत बंद को अपूर्व सफल बनाने के लिए देश की जनता को धन्यवाद देता है। देश के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है, जब किसी एक मुद्दे पर समूचे विपक्ष ने एकजुटता दिखाई। मूल्यवृद्धि पर तुरंत लगाम कसी जानी चाहिए।"
शरद यादव (संयोजक, राष्ट्रीय जनतांत्रिक गंठबंधन) : "संप्रग सरकार ने देश की जनता को बाजार और आसमान (मानसून) के भरोसे छोड़ दिया है। सरकार कहती है कि बाजार में सुधार आएगा तो ठीक हो जाएगा। दूसरी ओर प्रधानमंत्री कहते हैं कि बारिश होगी तो महंगाई में कमी आ जाएगी। मैं कहना चाहता हूं कि भारत यूरोप नहीं है, इसलिए हमारी मांग है कि सरकार अपनी खाद्य नीति में बदलाव करे।"
नितिन गडकरी (अध्यक्ष, भारतीय जनता पार्टी) : "महंगाई में हो रही वृद्धि सरकार की गलत नीतियों का परिणाम है। जब महंगाई करीब 13 प्रतिशत हो, ऐसे समय में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में वृद्धि करना जनता के साथ विश्वासघात है। कांग्रेस ने सत्ता में वापसी के बाद लोगों से महंगाई कम करने का वादा किया था, लेकिन उसके शासन काल में महंगाई तीन गुना बढ़ चुकी है।"
अरुण जेटली (राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष) : "कांग्रेस की अगुवाई वाली केंद्र सरकार की गलत आर्थिक नीतियों के कारण महंगाई बढ़ी है, जिसने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। बंद को सफल बनाने के लिए मैं देश की जनता के प्रति आभार प्रकट करता हूं और एकता दिखाने के लिए सभी विपक्षी दलों को धन्यवाद देता हूं।"
अखिलेश यादव (समाजवादी पार्टी की उत्तर प्रदेश इकाई के अध्यक्ष) : "केंद्र सरकार केवल उद्योगपतियों का हित साधने में जुटी हुई है और उन्हें फायदा पहुंचाने के लिए आम आदमी का निवाला छीन रही है। यह बंद आम आदमी की आवाज है, जिस पर केंद्र सरकार को गौर करना चाहिए।"
लालू प्रसाद (अध्यक्ष, राष्ट्रीय जनता दल) : "यह सरकारी बंद था। पटना में बाजार बंद करवाने में प्रशासन के लोग भी लगे रहे। हमारी पार्टी भी महंगाई का विरोध करती है, लेकिन हम लोक जनशक्ति पार्टी के साथ 10 जुलाई को अलग से बंद का आह्वान करेंगे।"
सीताराम येचुरी (माकपा पोलित ब्यूरो सदस्य) : "बंद के दौरान जनता स्वत:स्फूर्त सड़कों पर उतर आई और उसने बंद का समर्थन किया। भारत बंद की सफलता के बाद वामपंथी दल तथा अन्य धर्मनिरपेक्ष दल साथ बैठकर आगे की रणनीति पर चर्चा करेंगे। यदि मूल्य वृद्धि वापस नहीं हुई तो यह मुद्दा संसद में गूंजेगा।"
एन.चंद्रबाबू नायडू (अध्यक्ष, तेलुगू देशम पार्टी) : "भारत बंद सफल रहा, क्योंकि सभी वर्गो के लोगों ने इसमें स्वैच्छिक तौर पर हिस्सा लिया। सरकार को कीमत वृद्धि की गंभीरता को समझना चाहिए और उसे वापस लेना चाहिए, वरना विपक्ष का विरोध जारी रहेगा।"
वी.के.मल्होत्रा (भाजपा नेता) : "आवश्यक वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि को देखते हुए लोगों के लिए एक या दो घंटे का बंद समस्या नहीं है। इस कदम का उद्देश्य बहरी सरकार को आम आदमी की समस्याएं सुनाना था।"
शीला दीक्षित (दिल्ली की मुख्यमंत्री ) : "हमारी सरकार भी महंगाई से चिंतित है। बढ़ती महंगाई से हम सभी को परेशानी है और (कांग्रेस) सरकारें चाहे केंद्र की हो या अन्य कहीं की, इससे चिंतित हैं।"
अभिषेक मनु सिंघवी (कांग्रेस प्रवक्ता) : "विपक्ष का बंद जनविरोधी, विघटनकारी और असंवैधानिक है। इस बंद से भाजपा को कुछ भी हासिल नहीं हुआ। भाजपा एक जिम्मेदार विपक्ष का व्यवहार नहीं कर रही है, क्योंकि भाजपा के नेतृत्व वाली राज्य सरकारों ने बंद प्रायोजित किया।"
मोंटेक सिंह अहलूवालिया (योजना आयोग के उपाध्यक्ष ) :- "ईंधन कीमतों में वृद्धि का विरोध कोई अर्थ नहीं रखता।"
चंद्रजीत बनर्जी (सीआईआई के महानिदेशक) : "देश के विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में बंद का अलग-अलग असर रहा, लेकिन सीआईआई के अनुमान के मुताबिक बंद के कारण अर्थव्यवस्था को 3,000 करोड़ से भी अधिक का नुकसान होगा। किसी भी तरह के बंद का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी कामगारों और छोटे व्यापार पर निर्भर लोगों पर पड़ता है। परिवहन क्षेत्र भी उद्योग का एक हिस्सा है, जिस पर बंद का बड़ा असर पड़ा है।"
फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) :-"अर्थव्यवस्था को 13,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।"
एसोसिएटेड चैंबर्स ऑफ कामर्स एंड इंडस्ट्री ऑफ इंडिया (एसोचैम) :- "भारत बंद के कारण देश में उत्पादन पर भारी असर पड़ा है। उत्पादन ठप होने से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।"
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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