गैस त्रासदी पीड़ितों के लिए 1265 करोड़ रुपये मंजूर (राउंडअप)
इसके साथ ही सरकार ने कहा कि वह गैस त्रासदी के मुख्य आरोपी तथा यूनियन कार्बाइड इंडिया के तत्कालीन मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) वारेन एंडरसन के अमेरिका से प्रत्यर्पण के संभावित विकल्पों का परीक्षण कर रही है।
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक के बाद सूचना और प्रसारण मंत्री अंबिका सोनी ने संवाददाताओं को बताया कि सरकार ने मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपये, स्थायी रूप से विकलांग लोगों को पांच लाख रुपये और कैंसर एवं गुर्दे संबंधी बीमारी से ग्रस्त लोगों को दो लाख रुपये मुआवजा देने का फैसला किया है।
उन्होंने कहा कि इस त्रासदी से 45,000 से अधिक पीड़ितों को अतिरिक्त मुआवजा दिया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी पर केंद्रीय गृह मंत्री पी. चिदंबरम की अध्यक्षता में गठित मंत्री समूह ने पीड़ितों के लिए मुआवजे में वृद्धि का प्रस्ताव दिया था। मंत्री समूह की सिफारिशों पर ही ये फैसले लिए गए।
सोनी ने कहा कि महान्यायवादी इस बात का परीक्षण करेंगे कि भोपाल गैस पीड़ितों को मिले मुआवजे को बढ़ाने के लिए याचिका दाखिल की जा सकती है या नहीं। भोपाल गैस पीड़ितों के लिए 47 करोड़ अमेरिकी डॉलर मुआवजे का समझौता हुआ था।
सोनी ने कहा, "वारेन एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए अतिरिक्त कागजात विदेश मंत्रालय और अन्य एजेंसियों द्वारा जुटाए जा रहे हैं। इसके बाद एंडरसन के प्रत्यर्पण के लिए दबाव बनाया जाएगा।"
उन्होंने कहा कि इस संबंध में सर्वोच्च न्यायालय में भी दरवाजा खटखटाया जाएगा, जिसने 13 सितंबर 1996 को अपने एक आदेश में गैस त्रासदी के आरोपियों के खिलाफ लगाई गई धाराओं को हल्का कर दिया था।
सोनी ने कहा कि सत्र न्यायालय के फैसले पर उच्च न्यायालय में एक समीक्षा याचिका भी दायर की जाएगी।
सरकार यूनियन कार्बाइड का अधिग्रहण करने वाली कंपनी डाउ केमिकल्स की जवाबदेही पर भी ध्यान दे रही है।
उल्लेखनीय है कि भोपाल गैस त्रासदी में 25 साल बाद सात जून को अदालत ने फैसला सुनाया था। इसमें सात भारतीय आरोपियों को दो-दो साल की सजा सुनाई गई। इन्हें सजा सुनाने के तत्काल बाद जमानत मिल गई थी।
इस फैसले के बाद देशभर में तीव्र प्रतिक्रिया हुई थी और विरोध के स्वर उभरे थे।
इसके बाद सरकार ने मंत्री समूह को पुनर्गठित कर 10 दिन में रिपोर्ट देने को कहा था।
इंडो-एशियन न्यूज सर्विस।












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